नगरपालिका का दर्जा मिलने के बाद भूना शहर की श्रेणी में तो आ गया, लेकिन धरातल पर मूलभूत सुविधाओं में ग्रामीण एरिया से भी पिछड़ा हुआ है। टूटी हुई सड़कें, पीने के पानी को तरसते लोग व बदहाल सफाई व्यवस्था ने वार्ड नंबर एक के लोगों को पंचायती राज की सुविधाओं की याद दिला दी है। लोगों को जो शहरी सुविधाएं मिलनी चाहिए थी, वह पांच साल बीतने के बावजूद भी नहीं मिल पाई है। लोगों पर नगरपालिका के अलग-अलग प्रकार के टैक्स की मार जरूर पड़ी है।
हालात ऐसे हैं कि भूना के लोग शहर की बजाय फिर पंचायत बनाने की मांग करने लगे हैं। हालांकि, वार्ड नंबर एक के निवर्तमान पार्षद ने वार्ड के विकास को लेकर प्रयास किए थे। मगर अधिकारियों व पार्षदों के बीच तालमेल नहीं बन पाया। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ा। वार्ड के लोग टूटी गलियों व पीने के पानी की समस्या को लेकर पार्षद से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। लोगों ने अब हलका विधायक से उम्मीद लगाई है कि वह सुध लेकर समस्याओं से छुटकारा दिलवाएंगे। संवाद
वार्ड नंबर एक में हैं 450 घर, तीन हजार की आबादी
भूना के वार्ड नंबर एक में करीब 450 घर हैं। वार्ड की आबादी तीन हजार है, जिनमें से 1250 मतदाता हैं। वार्ड में पांच कॉलोनी है, इनमें कंबोज कॉलोनी, सैनी कॉलोनी, अफसर कॉलोनी, गुरद्वारा सिख कॉलोनी, शहीद भगत सिंह कॉलोनी व शास्त्री मंडी के अलावा टोहाना रोड क्षेत्र का रिहायशी एरिया जुड़ा हुआ है।
ये हैं प्रमुख समस्याएं
- पानी निकासी की व्यवस्था नहीं, बारिश के दिनों में जमा रहता है पानी।
- कंबोज कॉलोनी में पीने की पानी की किल्लत।
- वार्ड की कई गलियां दो साल से सीवरेज पाइप लाइन डालने के बाद से जगह-जगह से टूटी हुई है।
- शास्त्री मंडी में आवारा पशुओं का जमावड़ा।
- लीखा वॉच वाली गली व कंबोज कॉलोनी में नहीं डाली गई है सीवरेज पाइप।
कोट
वार्ड में मूलभूत सुविधाओं देने के लिए खूब संघर्ष किया। वार्ड की 55 कच्ची गलियों को इंटरलॉकिंग से पक्का करवाया। पीने के पानी की समस्या का निदान करने के लिए बूस्टिंग स्टेशन लग चुका है, जिसके बाद वार्ड में 24 घंटे सप्लाई होगी। स्ट्रीट लाइट पूरे वार्ड को जगमग कर रही है। कुछ गलियां खस्ता हालत में है, उनको सुधारने के लिए अधिकारिक तौर पर एस्टीमेट बना कर दिए जा चुके हैं।
नरेंद्र बागड़ी, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 1।
कोट
शहर की खस्ताहाल गलियों के सुधारीकरण को लेकर पार्षद ने एजेंडा बैठक में जो नाम दिए थे, उनमें अधिकतर गली नई बन चुकी हैं। शास्त्री मंडी व अनाज मंडी के पीछे की गली से संबंधित कोई शिकायत नहीं मिली। पार्षदों की गुटबाजी के चलते विकास कार्यों में बाध्यता भी रही।
सुरेंद्र कुमार, जेई, नगरपालिका भूना।