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Fatehabad News: 9 करोड़ खर्च के बाद भी फेल हुआ निकासी प्रोजेक्ट, 200 से अधिक परिवारों ने किया पलायन

Thu, 11 Sep 2025 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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गांव चिंदड़ में जलभराव होने से बंद पड़े ढा​णियों के रास्तें। संवाद
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फतेहाबाद। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित गांव चिंदड़ में मानसून की बारिश इस बार राहत नहीं, आफत बनकर बरसी। गांव में करीब 700 घर हैं। इनमें से करीब 350 परिवार ढाणियों में रह रहे हैं। इनमें से 200 से अधिक परिवार पलायन कर गए है। कारण, बारिश के हुए जलभराव होना है।
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बारिश के बाद हुए जलभराव ने व्यापार, पशुपालन और बच्चों की पढ़ाई पर भी गहरा असर डाला है। हालांकि प्रशासन की ओर से यहां 9 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जलनिकासी और सेम सुधार प्रोजेक्ट लगाए गए हैं, लेकिन बारिश के पहले ही झटके में पूरी व्यवस्था ढह गई।
जलभराव के बाद से लोग घर से बेघर होकर रिश्तेदारों के पास रहने को मजबूर हो गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार पिछले 15 वर्षों से यह समस्या है। जलभराव से जहां फसलें बर्बाद हो रही हैं उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर हो रही है। इसके बावजूद भी कोई अधिकारी या नेता जायजा लेने नहीं पहुंचा है।
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सेम और निकासी पर करोड़ों खर्च, पर नतीजा शून्य
गांव में सेम की समस्या खत्म करने के लिए करोड़ों रुपये से 18 सोलर ट्यूबवेल और पाइपलाइन का प्रोजेक्ट बनाया गया था, लेकिन वह भी शुरू ही नहीं हो पाया। वहीं सिंचाई विभाग ने एसटीपी लगाकर दो पंपों से निकासी की योजना शुरू की, लेकिन पाइपलाइन पहली ही बारिश में जगह-जगह से लीक हो गई। परिणामस्वरूप, पिछले एक माह तक गांव में पानी भरा रहा। प्रशासन तब जागा जब ग्रामीणों ने विरोध किया। बुधवार को प्रशासन ने पाइप भेजे और वीरवार को दो पंप चालू किए। ग्रामीणों की मांग है कि पंपों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि निकासी तेज हो सके।
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विद्यार्थियों की उपस्थिति हुई कम
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चिंदड़ में गांव सारंगपुर से भी विद्यार्थी आते हैं। जलभराव के कारण करीब 25% विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। कारण, रास्तों में 5 फीट तक पानी भरा है। स्कूल परिसर में भी जलभराव है, जिसके कारण प्रार्थना सभाएं बंद हो गई हैं और विद्यार्थी गैलरी में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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सेम के पेयजल की हो रही आपूर्ति
गांव के जलघर की स्थिति भी चिंताजनक है। जलभराव का दूषित पानी पीने के पानी में मिल रहा है क्योंकि जलघर का स्तर खेतों से नीचा है। फिल्टर पिछले कई वर्षों से खराब हैं, और इसी कारण दूषित पानी की आपूर्ति से लोग बीमार पड़ रहे हैं।
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10 वर्षों से नहीं मिला मुआवजा, किसान बेहाल
हरि सिंह, पवन, ओमप्रकाश, जगदीश, अशोक समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि जलभराव से पिछले 10 वर्षों से फसलें और पशुपालन प्रभावित हो रहा है। हर बार बुआई के बाद हल्की बारिश में ही खेतों में पानी भर जाता है। सरकार की ओर से मुआवजे की बात तो होती है, लेकिन अब तक केवल एक बार ही चिंदड़ के किसानों को मुआवजा मिला है।
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मेरी ढाणी धारणियां-बड़ोपल रोड पर है। ढाणी के चारों और तीन से पांच फीट तक पानी जमा हो चुका है। मिट्टी डालकर रास्ता बनाया है। ढाणी में बने मकानों में दरारें आ गई हैं। प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिल रही है।
-ओमप्रकाश, ग्रामीण।
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मेरे खेत में करीब तीन फीट तक पानी जमा है। इससे फसलें पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं। वहीं रबी की फसल गेहूं व सरसों की बिजाई होनी मुश्किल है। ऐसे में प्रदेश सरकार को किसानों की आर्थिक मदद करते हुए जलनिकासी का स्थायी प्रबंध करने चाहिए।
-हरि सिंह सिहाग, ग्रामीण।
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मेरी ढाणी धारणियां-चिंदड़ रोड पर है। ढाणी के चारों ओर पानी जमा होने से एक मकान गिर चुका है। मुझे भी ढाणी छोड़कर गांव के खाली पड़े घर में शरण लेनी पड़ी है। किसी भी अधिकारी या नेता से अभी तक कोई सहायता नहीं मिली।
-जगदीश, ग्रामीण।
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मेरी ढाणी सारंगपुर रोड पर है। करीब ढाई फीट तक पानी जमा है। मकानों में दरारें आ चुकी हैं। ढाणी के चारों और मिट्टी डालकर बचाव का प्रबंध किया जा रहा है। अभी तक उनकी ढाणियों में कोई भी उनकी सुध लेने के लिए नहीं आया है।
-अशोक, ग्रामीण।
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पिछले कई वर्षों से आई सेम के कारण मकान पहले खराब हो चुके हैं। फसलें नष्ट हो रही हैं। ऐसे में आर्थिक तंगी से परेशान हो चुके हैं। लोगों को मकान बनाना तो दूर की बात आजीविका चलाना पाना भी चुनौती बन गया है।
-हरि सिंह, ग्रामीण।
:: गांव चिंदड़ में जलनिकासी के लिए 7 पंप चल रहे हैं। गांव चिंदड़ से नहर की दूरी 9 किलोमीटर है। ऐसे में पानी निकालने में करीब 10 दिन लग सकते हैं। जलनिकासी के लिए बनाए गए एसटीपी प्वाइंट सही चल रहे हैं।
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-विनोद कुमार, कार्यकारी अभिंयता, सिंचाई विभाग, आदमपुर।
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