रतिया में एसडीएम कोर्ट में अपना नामांकन दाखिल करते जरनैल सिंह।
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रतिया। पूर्व विधायक जरनैल सिंह आखिरकार कांग्रेस की टिकट लाने में कामयाब रहे। जरनैल सिंह ने वीरवार को पांचवीं बार विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया। इससे पहले वे चार बार विस चुनाव लड़ चुके हैं और दो बार जीत भी हासिल कर चुके हैं।
2 जुलाई 1961 में जन्मे 58 वर्षीय जरनैल सिंह ने अपना राजनीतिक सफर 1987 में शुरू हुआ था। तब उन्होंने भजनलाल के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी। उसके बाद वह इनेलो में आ गए और 2000 में इनेलो की टिकट से पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और पहले विधानसभा चुनाव में ही रतिया के विधायक चुने गए। हालांकि 2004 में उन्हें इनेलो का टिकट नहीं मिला तो उसके बाद जरनैल सिंह ने हजकां ज्वाइन कर ली व बाद में 2008 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुवाई में कांग्रेस में शामिल हो गए व 2009 में कांग्रेस पार्टी ने जरनैल सिंह को टिकट दी और दूसरी बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे जरनैल सिंह इनेलो के ज्ञान चंद ओड से हार गए। 2011 में ज्ञान चंद ओड के निधन के बाद हुए रतिया उपचुनाव में एक बार फिर कांग्रेस पार्टी की टिकट पर जरनैल सिंह ने तीसरा विधानसभा चुनाव लड़ा और इनेलो पार्टी की सरफी देवी को हराकर दूसरी बार विधायक चुने गए व हुड्डा सरकार में हरियाणा एग्रो का चेयरमैन नियुक्त किए गए। 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें तीसरी बार फिर टिकट दी लेकिन अपने चौथे विधानसभा चुनाव में जरनैल सिंह हार गए व तीसरे स्थान पर रहे।