फतेहाबाद। अवैध कॉलोनियों को वैध करने की समीक्षा के लिए उपायुक्त मनदीप कौर की अध्यक्षता में नगर योजनाकार, राजस्व विभाग, विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में नगर योजनाकार विभाग द्वारा जिला में नियमित होने वाली आठ कॉलोनियों के आवेदन रखे, जिस पर विचार विमर्श हुआ और उपायुक्त ने एसडीएम को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से आए आवेदनों वाली कॉलोनियों का निरीक्षण करें और नियमावली के अनुसार इसकी रिपोर्ट दें।
उपायुक्त मनदीप कौर ने बताया कि नगर निकाय की सीमा के बाहर बसाई गई अवैध कॉलोनियों को नियमित करवाने के लिए पॉलिसी बनाई गई है। इस पॉलिसी के अनुसार कोई भी काॅलोनाइजर, प्रॉपर्टी डीलर, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन या पांच से ज्यादा कॉलोनी वासी जिला नगर योजनाकार कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। इनके आवेदनों पर जिला स्तरीय कमेटी नियम व मापदंड पूरे करने वाली अवैध कॉलोनियों को वैध करने की अनुशंसा करेगी। बैठक में जिला नगर योजनाकार द्वारा फतेहाबाद उपमंडल की चार, उपमंडल टोहाना की तीन व रतिया उपमंडल की एक कॉलोनी के आवेदन विचार के लिए रखे।
इस बैठक में एसडीएम प्रतीक हुड्डा, राजेश कुमार, जगदीश चंद्र, जिप सीईओ कुलभूषण बंसल, डीडीपीओ बलजीत सिंह चहल, कार्यकारी अभियंता देवेंद्र सिंह, केसी कंबोज, तहसीलदार विजय कुमार, नायब तहसीलदार राजेश गर्ग, बलराम जाखड़ सहित समिति सदस्य मौजूद रहे।
विकास शुल्क दो फीसदी घटा
बैठक में जिला नगर योजनाकार गुंजन वर्मा ने बताया कि अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की पॉलिसी में राज्य सरकार द्वारा खाली जगह का विकास शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर आठ प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा बने हुए निर्माणों का विकास शुल्क पांच प्रतिशत ही रखा गया है। रिहायशी क्षेत्र से दूर स्थित कॉलोनियों का न्यूनतम क्षेत्र दो एकड़ निर्धारित किया गया है। रिहायशी क्षेत्र के साथ लगती कॉलोनियों का कोई भी न्यूनतम एरिया निर्धारित नहीं किया गया है। जिन कॉलोनियों में व्यवसायिक क्षेत्र चार प्रतिशत से अधिक हैं, उनमें विकास शुल्क रिहायशी क्षेत्र से तीन गुना अधिक लिया जाएगा।
छोटी कॉलोनियां भी होंगी वैध
अब छोटी कॉलोनियां भी वैध हो सकेंगी, जिनकी बड़ी कॉलोनियों के साथ अप्रोच रोड लगती है। उपायुक्त की अध्यक्षता में इस बारे एक कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसमें जिला नगर योजनाकार, जिला परिषद कार्यकारी अधिकारी, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी एवं लोक निर्माण अभियांत्रिकी आदि विभागों के अधिकारी शामिल होंगे, जो मौका मुआयना कर अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके उपरांत तहसीलदार द्वारा अवैध कॉलोनियों के सभी प्लाट धारकों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी।