फतेहाबाद। ठंड बढ़ने के साथ बच्चों में वायरल निमोनिया व बड़ों में संक्रमण के मामले में इजाफा हो रहा है। शनिवार को जिला नागरिक अस्पताल में शिशु रोग चिकित्सक के पास काफी संख्या में छोटे बच्चों की ओपीडी में बढ़ी।
वहीं चिकित्सक ने दवा के साथ बच्चों के कान ढक कर रखने और ठंड से बचाने का सुझाव दिया। ठंड बढ़ने के साथ फेफड़ों पर वायरस का हमला तेज हो गया है। नागरिक अस्पताल में आने वाला निमोनिया का लगभग हर सातवां मरीज इसी का शिकार पाया जा रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वरुण मुंजाल ने बताया कि इन दिनों कई प्रकार के वायरस बच्चों को वायरल निमोनिया का शिकार बना रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ओपीडी में आने वाले निमोनिया के 30 प्रतिशत बीमार बच्चे वायरल निमोनिया के मिल रहे हैं। इसका कोई इलाज नहीं है। एंटीबायोटिक दवा से ही वायरल निमोनिया का इलाज किया जा रहा है। निमोनिया ठीक करने के लिए कांप्लेक्स एंटीबायोटिक दवाएं देनी पड़ रही हैं। निमोनिया के मरीज के लिए पांच दिन का एंटीबायोटिक दवा का कोर्स होता है।
वायरल निमोनिया के लक्षण
- बुखार व खांसी के साथ लगातार सांस लेने में तकलीफ और सांस लेने की गति तेज होना।
- जन्म से दो माह के बच्चे में सांस की गति प्रति मिनट 60 से अधिक हो और खांसी व बुखार हो।
- दो महीने से एक साल के बच्चों में सांस की गति 50 प्रति मिनट और एक से पांच साल के बच्चे में 40 से अधिक हो।
ओपीडी में लगातार हो रहा इजाफा
- फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में छोटे बच्चों के साथ ही बड़ों व बुजुर्गों में बढ़ रही ठंड के कारण हो रहे संक्रमण के कारण ओपीडी बढ़ रही है। शनिवार को अस्पताल में कुल 500 से अधिक मरीजों ने छाती रोग विशेषज्ञ व शिशु रोग विशेषज्ञ व अन्य डॉक्टरों से अपना इलाज करवाया।
लगातार ठंड बढ़ने से छोटे बच्चों, बड़ों व बुजुर्गों में छाती रोग काफी सक्रिय होता है। जिस कारण बच्चों में निमोनिया व बड़ों व बुजुर्गों में संक्रमण हो जाता है। छोटे बच्चों को ठंड से पूरी तरह बचाकर रखना चाहिए।
- डॉ. मनीष टुटेजा, छाती रोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल, फतेहाबाद।