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परेशानियों के आगे हथियार डाल रहे जिलेवासी, एक माह में 10 सुसाइड

Thu, 16 Mar 2017 11:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमित रूखाया
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मनोचिकित्सक एवं डिप्टी सीएमओ डा. गिरीश । - फोटो : Amar Ujala
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जिलेवासी घरेलू कलह और मानसिक परेशानियों के आगे हथियार डालते दिख रहे हैं। कम से कम पिछले एक माह में 10 सुसाइड के आंकड़े तो यही साबित कर रहे हैं। सुसाइड के इन 10 मामलों में दो-तीन मामले तो ऐसे निकले, जिसमें मौत के कारणों का पता ही नहीं चल पाया। इन 10 मौतों में दो मासूम बच्चों के नाम भी शामिल हैं। पिछले दो दिन में ही तीन मौतें हो चुकी हैं। मनोचिकित्सक इसके पीछे कमजोर सहनशीलता को भी एक कारण मान रहे हैं। बढ़ते सुसाइड के मामलों के कारण स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अप्रैल से लोगों की जागरूकता के लिए शिविर लगाने की बात कह रहे हैं।
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घरेलू कलह और मानसिक परेशानी बड़े कारक
पिछले एक माह में 10 में से लगभग छह मौतें मानसिक परेशानी और घरेलू कलह के कारण हुई हैं। नथवान में हुई विवाहिता का जहर निगलना या फिर जाखल में बीते 10 फरवरी को विवाहिता के जहर निगलने के पीछे पति-पत्नी के बीच के विवाद मुख्य वजह थे। ढिंगसरा में पिता के दो पुत्रों के साथ नहर में कूदने के पीछे क्या कारण थे, ये भी रहस्य ही रह गया। ऐसे कई मामले रहे जिसमें मरने वाले व्यक्ति ने अपनी मौत का असल कारण ही जाहिर नहीं किया। लेकिन अधिकतर मामलों में मानसिक परेशानी या कलह ही सबसे बड़ा कारण बने। सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सक ये मानते हैं कि आत्महत्या कोई सोच-समझकर की जाने वाली प्रक्रिया नहीं है। ये त्वरित कार्यवाही है। जो गुस्से में या किसी बड़ी मुसीबत के आने से एकाएक ही हो जाती है।

किया था सुसाइड का प्रयास, अब खुश है जान बचने से
सरकारी अस्पताल में कार्यरत एक कर्मचारी ने बीते दिनों परेशानियों से तंग आकर फांसी का फंदा लगाकर अपनी जान देने का प्रयास किया। लेकिन भाग्यवश उसकी पत्नी मौके पर पहुंच गई और उसने खुद को संतुलित रखते हुए अपने पति की जान बचा ली। कुछ दिन उपचार के बाद अब उक्त स्वास्थ्य कर्मी खुश है कि उसकी जान बच गई। वह अब अधिक उत्साह से अपने परिवार और पत्नी की देखरेख कर रहा है।
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गलत ख्याल मन में आएं तो अपनाएं ये तरीके
1. परिवार और छोटे बच्चों के बारे में सोचिए।
2. किसी मंदिर आदि में जाकर ध्यान लगाएं।
3. अकेला रहने की आदत छोड़ दें ।
4. अपनी पत्नी, मां-बाप आदि परिजनों की तस्वीर हमेशा साथ रखें।
5. बीमारी से ग्रस्त हैं तो भी दवाई और उपचार को सकारात्मकता से लें ।
6. मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति को अकेला न छोड़ें।
7. खुद को लगातार कामों में लगाए रखें, ताकि अकेलेपन में मन में ऐसे कोई नकारात्मक विचार न आ सकें।

पिछले एक माह में हुई घटनाएं

1. 10 फरवरी को जाखल में पति से झगड़े के बाद पत्नी ने जहर खाया।
2. फरवरी में रतिया के गांव नथवान में एक विवाहिता ने जहर खाकर जान दी।
3. 10 फरवरी को ही भट्टू के गांव ढिंगसरा में एक व्यक्ति ने दो बच्चों के साथ नहर में छलांग लगाई।
4. 15 मार्च को युवती ने घरेलू कलह से तंग आकर फांसी का फंदा लगा लिया।
5. 15 मार्च को ही एक महिला ने भाखड़ा में छलांग दी। अब तक महिला लापता है।
6. जाखल में एक युवक ने मानसिक परेशानी के चलते फांसी लगा ली।
7. मार्च के प्रथम सप्ताह में एक व्यक्ति ने ट्रेन के नीचे आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

आत्महत्या सोच-समझकर नहीं की जा सकती। ये किसी भी घटना के रिएक्शन में की गई त्वरित कार्यवाही है। अकेलेपन को खत्म करके ही इस समस्या से निपटा जा सकता है। हाल ही में सरकार ने एक विशेष मानसिक जागरूकता कैंप लगाने का निर्णय लिया है। फतेहाबाद में अप्रैल से इन कैंपों का आयोजन होगा, जिसमें लोगों को ऐसी समस्याओं या परेशानियों से दूर रहने के लिए जागरूक किया जाएगा।
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-डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक एवं डिप्टी सीएमओ, फतेहाबाद ।
 
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