फतेहाबाद। जिले की 75.70 फीसदी आबादी आभा डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ चुकी है। अब शेष 3.14 लाख लोगों को इस व्यवस्था में शामिल करना स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों की मदद से पंजीकरण अभियान तेज किया जाएगा।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयोजित जिलास्तरीय कार्यशाला में पंजीकरण बढ़ाने और आपसी समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया। सिविल सर्जन डॉ. बुधराम की अध्यक्षता में हुई कार्यशाला में बताया गया कि जिले की कुल आबादी 12,94,461 है। इनमें से 9,79,917 लोगों के आभा पहचान-पत्र बनाए जा चुके हैं।
इस तरह जिले में आभा कवरेज 75.70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अभी 3,14,544 नागरिक इस व्यवस्था से बाहर हैं। इन्हें जोड़ने के लिए प्रयास तेज करने होंगे। आभा यानी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान-पत्र है।
इसके माध्यम से मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध हो सकती है। इससे मरीजों को पुरानी मेडिकल फाइलें और जांच रिपोर्ट साथ लेकर घूमने की परेशानी से राहत मिल सकती है। जरूरत के समय स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक पहुंच आसान बनाने में भी यह व्यवस्था मददगार है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की प्रभारी एवं उप-सिविल सर्जन डॉ. सुशील ने कहा कि आभा, स्वास्थ्य सेवा पेशेवर रजिस्ट्री और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री में दर्ज जानकारी सही, सत्यापित और अद्यतन होनी चाहिए। इससे डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
आभा के राज्य प्रोजेक्ट संयोजक विशाल चुघ ने प्रतिभागियों को मिशन के तकनीकी पहलुओं और पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने लाइव आभा पहचान-पत्र बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। कार्यशाला में सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के साथ संबंधित एसोसिएशनों को अभियान में भागीदार बनाने पर जोर दिया गया।
मोबाइल फोन पर उपलब्ध हो सकेगा डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड
आभा कार्ड का उद्देश्य केवल नागरिकों को एक डिजिटल पहचान देना नहीं बल्कि उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना है। इससे मरीज की सहमति के आधार पर उसकी मेडिकल हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट, दवाओं और इलाज से संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। मरीज को पुरानी फाइलें साथ लेकर चलने की जरूरत कम होगी और दूसरे अस्पताल में इलाज के दौरान भी संबंधित स्वास्थ्य रिकॉर्ड साझा करना आसान हो सकता है।
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नर्सिंग पेशेवरों के पंजीकरण में प्रदेश में अव्वल
कार्यशाला में स्वास्थ्य सेवा पेशेवर रजिस्ट्री (एचपीआर) की उपलब्धि भी साझा की गई। फतेहाबाद प्रदेश का पहला जिला बन गया है जहां सरकारी क्षेत्र के नर्सिंग पेशेवरों का पंजीकरण 100 प्रतिशत पूरा हो चुका है। जिले में चिकित्सकों का पंजीकरण भी 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अब फार्मासिस्टों का पंजीकरण पूरा कराने के लिए विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया गया।