एक ओर प्रदेश की जीटी बेल्ट मूसलाधार बरसात से बाढ़ की आशंका से ग्रस्त है वहीं, राजस्थान सीमा से सटे फतेहाबाद जिले के भट्टू में इस बार सूखे की आशंका जताई जा रही है। इस बार भट्टू में मानसून की बारिश का आंकड़ा औसत बारिश से भी काफी कम है। इसके चलते इसका सीधा असर खेतों में खड़ी फसलों पर दिखाई पड़ रहा है। इस मौसम में बिजाई की जाने वाली लगभग छह बड़ी फसलों के पौधे या तो मुरझा गए हैं या फिर बीमारी की चपेट में आ गई हैं। इस स्थिति भट्टू क्षेत्र के किसानों के लिए आगे मुसीबतों का समय आना भी तय माना जा रहा है। जिसके चलते इस इलाके के किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।
28 हजार हेक्टेयर भूमि पर हुई है खेती, सब संकट में
भट्टू खंड में तकरीबन 35 गांव पड़ते हैं। लगभग सभी गांव किसी ना किसी तरह से राजस्थान सीमा से सटे हैं। जिसके चलते ये इलाका बरानी इलाके के रूप में जाना जाता है। बरानी इलाके उन जगहों को कहते हैं, जहां पर नहरी पानी की सप्लाई ना के बराबर होती है। इस इलाके में इस बार आठ हजार हेक्टेयर भूमि पर ग्वार, 1550 हेक्टेयर भूमि पर बाजरा, 1600 हेक्टेयर पर दलहन, एक हजार हेक्टेयर भूमि में मूंगफली, सौ एकड़ में मक्की, 13,900 हेक्टेयर में नरमा और 2 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की बिजाई की गई है। इस बार मानसून की बरसात भट्टू में काफी कम हुई है। रिकार्ड के अनुसार भट्टू में जुलाई माह में जहां महज 25 एमएम बारिश हुई वहीं अगस्त में अब तक मात्र सात एमएम पानी गिरा है।
यह सामान्य बारिश से काफी कम है। यही कारण है कि फसलों में पर्याप्त पानी ना मिलने से फसलें मुरझा गई हैं। गांव दैयड़, रामसरा, मेहूवाला, ढाबी, पीलीमंदौरी, ठुइयां, वनमंदोरी, सूलीखेड़ा इत्यादि गांवों में ग्वार की फसल बिल्कुल ही जमीन पर बिछ गई है। जमीन खुश्क हो चुकी है। बारिश की कमी से गांव के बाहर की जमीनें दरक भी रही हैं। पर्याप्त पानी के अभाव में बीजी गई फसलों के नीचे की भूमि में रूखापन भी दूर से ही दिखाई देने लगा है।
इलाके में छह फसलें, प्रत्येक पर बीमारी का प्रकोप
मूंग की फसल में फल नहीं लग रहे जबकि पत्तों की ग्रोथ ज्यादा है। वेजिटेबल ग्रोथ से पत्ते तो हरे-भरे दिखाई पड़ रहे हैं जबकि फूल नहीं होने से कृषि विशेषज्ञ इन पौधों पर फल ना लगने की आशंका जता रहे हैं। इसी तरह मक्की की फसल को स्टेम बोरर नामक (तना छेदक) बीमारी ने घेर लिया है। यह एक प्रकार का कीड़ा होता है जो तने को छेदकर उसे खा जाता है और पौधा धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। मूंगफली की फसल को कोभलर गलन नामक बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है। मूंगफली का पौधा जमीन से बाहर आता है तो उसके गले में कोलर गलन की पकड़ हो रही है और यह बीमारी भी पौधा खत्म कर देती। नरमे की 6568 वैरायटी पर कॉटन लीफ कर्ल बीमारी का प्रकोप है। ये वायरल की तरह फैल रही है। हैरत इस बात की है कि अभी तक इस बीमारी का कोई तोड़ नहीं निकाला जा सका है।
जुलाई माह में बरसात (एमएम में)
फतेहाबाद टोहाना भट्टू रतिया
76 82 25 100
अगस्त माह में बरसात
- 29 07 36
स्त्रोत : राजस्व विभाग
‘बरसात की कमी के चलते जमीन खुष्क है और कहीं-कहीं रूखेपन की वजह से दरक भी रही है। अगर अब भी बरसात हो जाती है तो फसल का बचाव हो जाएगा।’
-छेलू राम, नायब तहसीलदार, भट्टूकलां।
‘जुलाई में 25 एमएम और अगस्त में अब तक 7 एमएम बारिश हुई है। हमारे पास भट्टू ब्लॉक में रेनगेज नहीं है। एक अनुमान है कि यहां पर औसत से कम बरसात हुई है। कहीं-कहीं फसल सूखे होने की सूचना मिली है।’
-बलवंत सहारण, कृषि उपनिदेशक, फतेहाबाद।
‘फसलों पर बिमारी के प्रकोप की सूचना है, लेकिन ये कहीं-कहीं है। बुधवार से कृषि विशेषज्ञों से इसका सर्वे करवाया जाएगा। इसके बाद ही औपचारिक रिपोर्ट दी जाएगी।’
-मुकेश महला, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी, फतेहाबाद।