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Fatehabad News: एक देश एक पाठ्यक्रम की उठाई मांग

Sun, 26 Jul 2026 10:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद के राजकीय महिला महाविद्यालय में दा​खिला प्रक्रिया में भाग लेती हुई छात्राएं स्त्रोत 
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फतेहाबाद। हिसार रोड स्थित जागो संस्था कार्यालय में रविवार को आयोजित बैठक में कारगिल युद्ध के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था और चुनाव प्रणाली में सुधार पर मंथन किया गया। संस्था पदाधिकारियों ने शिक्षा क्षेत्र में एकरूपता लाने के लिए एक देश, एक पाठ्यक्रम लागू करने की मांग उठाई।
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संस्था पदाधिकारियों ने कहा कि आजादी के 79 साल बाद भी देश की शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पाठ्यक्रम होने से विद्यार्थियों को समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
उन्होंने निजी स्कूलों में प्राथमिक स्तर की पढ़ाई पर चिंता जताते हुए कहा कि कई स्थानों पर पांचवीं कक्षा तक निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को ही प्राथमिकता दी जाती है।
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उन्होंने सरकारी स्कूलों में भी विभिन्न श्रेणियों के विद्यालयों के बीच शिक्षा स्तर में अंतर को दूर करने की मांग की। संस्था ने कहा कि 12वीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी करने के बाद भी कई विद्यार्थियों में भाषा ज्ञान कमजोर रहता है। पदाधिकारियों ने कोचिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अत्यधिक दबाव से विद्यार्थी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कोचिंग माफिया पर अंकुश लगाने और पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की। बैठक में संस्था अध्यक्ष देवेंद्र सिंह दहिया, सुरेंद्र असीजा, डिंपल चौधरी, उपप्रधान प्रमोद बजाज, संयुक्त सचिव सेवासिंह मुवाल, मिथलेश रोहिला, भारत गोयल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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एक देश, एक चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से हो
केंद्र सरकार द्वारा एक देश, एक चुनाव को लेकर चलाए जा रहे अभियान पर संस्था ने कहा कि यह कदम सही है लेकिन यह तभी पूरी तरह कामयाब होगा जब चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से हो। संस्था की मांग है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का चुनाव जनता सीधे खुद करे। अभी जनता विधायक और सांसद चुनती है जो बाद में मुखिया तय करते हैं। संस्था ने कहा कि हरियाणा में भाजपा सरकार ने नगर परिषद और नगर निगम अध्यक्षों के प्रत्यक्ष चुनाव तो करवा दिए लेकिन उनकी वित्तीय शक्तियां छीनकर उन्हें कमजोर कर दिया है। सरकार को चाहिए कि इन सीधे चुने गए अध्यक्षों को पूरी पावर दी जाए भले ही उनका कार्यकाल पांच के बजाय चार साल का कर दिया जाए।
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