फतेहाबाद। मानदेय बढ़ाने, न्यूनतम वेतन लागू करने और स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग पर रविवार को स्कीम वर्करों ने दीनदयाल पार्क में प्रदर्शन किया। सीटू के आह्वान पर जुटी वर्करों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
उन्होंने एक से तीन दिसंबर तक दिल्ली में संसद मार्च और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का एलान किया। इसके बाद राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला के नाम ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपकर संसद में मांगें उठाने का अनुरोध किया। सभा की अध्यक्षता गगनदीप और शीला शक्करपुरा ने की। सविता भूना और मदन सिंह ने मंच संचालन किया।
सीटू नेताओं ओमप्रकाश अनेजा, गगनदीप और शीला शक्करपुरा ने कहा कि देशभर में करीब एक करोड़ स्कीम वर्कर केंद्र सरकार की परियोजनाओं में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें अधिकतर महिलाएं हैं। पर्याप्त बजट और स्थायी व्यवस्था नहीं होने से उन्हें बेहद कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है।
सुमन धारणीया, सुमित्रा बड़ोपल, सुनील कुमार भट्टू, बेग राज, सोनू धांगड़, भागी भट्टू, अनीता दमकोरा और कांता पिरथला ने कहा कि महंगाई और महंगी शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के बीच मामूली मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शनकारी वर्करों ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने पर दिसंबर में दिल्ली पहुंचकर आंदोलन तेज किया जाएगा।
ये हैं प्रमुख मांगें
- 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार आंगनवाड़ी, आशा, मिड-डे मील और क्रैच वर्करों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
- न्यूनतम मासिक वेतन 42 हजार रुपये किया जाए।
- सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी और 21 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए।
- नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 रद्द की जाए।
- हटाई गई मिड-डे मील वर्करों को बहाल किया जाए।