फतेहाबाद। जिले में इस बार मानसून की देरी और सामान्य से काफी कम बारिश का असर खरीफ सीजन की फसलों पर साफ दिखाई देने लगा है। सबसे अधिक नुकसान धान की फसल को हुआ है। समय पर बारिश नहीं होने और खेतों में पर्याप्त नमी की कमी के कारण जिले में करीब 5 हजार एकड़ में लगी धान की फसल खराब हो गई है। कई स्थानों पर पौधों का विकास रुक गया है जिससे किसानों की चिंतित हैं।
कृषि विकास अधिकारी डॉ. बहादुर गोदारा ने बताया कि धान की फसल को शुरुआती दौर में पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है लेकिन इस बार मानसून की सुस्ती के कारण फसल को जरूरी नमी नहीं मिल सकी। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की बची हुई फसल पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
बारिश की कमी को देखते हुए इस वर्ष जिले के किसानों ने फसल की बिजाई में बदलाव किया है। धान के बजाय अधिक किसानों ने बाजरा और नरमा जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की खेती को प्राथमिकता दी है। किसानों का कहना है कि बदलते मौसम और अनिश्चित मानसून को देखते हुए कम पानी वाली फसलें अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम जोखिम वाली साबित हो रही हैं।
-
पिछले दो सालों में खरीफ फसलों का रकबा
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार खरीफ सीजन में फसलों के रकबे में बदलाव दर्ज किया गया है। वर्ष 2025 में जिले में धान का रकबा 16,196 हेक्टेयर, बाजरा 3,721 हेक्टेयर और नरमा 32,096 हेक्टेयर था। वहीं वर्ष 2026 में धान का रकबा घटकर 12,675 हेक्टेयर रह गया है जबकि नरमा का रकबा बढ़कर 34,382 हेक्टेयर तक पहुंच गया। बाजरा की खेती के क्षेत्रफल में भी परिवर्तन दर्ज किया गया है। वहीं इसको लेकर किसान रामप्रसाद, नरेंद्र, राजेंद्र और गोकुल का कहना है कि लगातार बदलते मौसम, कम बारिश और बढ़ती खेती लागत ने उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ा दी हैं। यदि जल्द राहत नहीं मिली तो उत्पादन में गिरावट के साथ किसानों पर आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
:: धान व अन्य सभी खरीफ फसलों के जुलाई माह में पर्याप्त बारिश होना आवश्यक होता है। इस बार बारिश लेट हुई है जिसका असर फसलों पर देखा जा रहा है। हालांकि अब मानसून आने से बारिश हुई है जिससे फसलों को लाभ मिलने के आसार है और मुरझा रही फसलों के फिर से लहलहाने की उम्मीद है।
- डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।