जाखल। क्षेत्र की जनता के लिए रेलवे लाइनों के नीचे 2017 में अंडरपास बनाने की घोषणा की गई थी। उस समय के प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सुभाष बराला ने लोगों की मांग पर इसका काम भी शुरू करवा दिया। बताया जा रहा है कि उस समय इसका 8 करोड़ रुपये बजट और निर्माण अवधि 2 साल तय हुई थी।
तब से लेकर इस अंडरपास में काम ही चल रहा है। सूत्रों के अनुसार इस अंडरपास का बजट लगभग दोगुना हो चुका है और इसका काम भी पूरा नहीं हुआ है। पिछले 8 साल से इसमें काम चलता आ रहा है। अंडरपास में लाइट की व्यवस्था न होने के कारण शाम होते ही इसमें अंधेरा छा जाता है। अंडरपास के काम में देरी के चलते स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है।
लोगों के अनुसार अंडरपास की रोड़ी उखड़ने लगी है। इस कारण से यहां हादसे होने का डर बना रहता है। वहीं लाइटिंग न होने से भी शाम होते ही अंडरपास में अंधेरा छा जाता है। इस कारण से हादसा होने के साथ-साथ वारदात का भी भय बना रहता है। उनकी मांग है कि अंडरपास में लाइटिंग का कार्य जल्द से जल्द करवाया जाना चाहिए।
नगर पालिका-रेलवे एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
रेलवे के अनुसार अंडरपास निर्माण का 90 फीसदी से ज्यादा काम पूरा है। इसमें लाइटिंग का काम बाकी है। लाइटिंग की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। वहीं नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि उनका काम सिर्फ देखरेख का है। जब रेलवे उन्हें लाइटिंग करके दे देगा उसके बाद उनकी जिम्मेदारी बनती है।
देरी और बढ़ी निर्माण लागत की जांच की मांग
अंडरपास के निर्माण में कथित अनियमितताओं को लेकर नेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल के महासचिव राजेश शर्मा ने रेलवे मंत्रालय को पत्र भेजकर इस अंडरपास के निर्माण, देरी और उसकी बढ़ी लागत की जांच की मांग की है। राजेश के अनुसार अंडरपास के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। बारिश के दिनों में इस अंडरपास में पानी जमा हो जाता है। इस कारण से लोगों को फिर से अवैध रूप से लाइनों के ऊपर से ही अपनी जान-जोखिम में डालकर जाना पड़ता है।
कई गांवों के हजारों लोगों को शहर से जोड़ता है अंडरपास
इस अंडरपास से तलवाड़ा, तलवाड़ी, जाखल गांव, साधनवास, सिधानी, चांदपुरा, म्योंद, कासिमपुर, उदयपुर सहित कई गावों की हजारों की आबादी इस अंडरपास से सीधे तौर पर प्रभावित है। इन गांवों से आने वाले लोगों को अंडरपास में पानी भरने या फिर किसी और परेशानी के चलते दो किलोमीटर दूर स्थित रेलवे ओवरब्रिज से होकर शहर आना पड़ता है।
करीब डेढ़ वर्ष पहले ही कार्यभार संभाला है। अंडरपास का अगर कुछ भी काम बाकी है तो उसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। अंडरपास में लाइट लगाने का कार्य नगर पालिका के अधीन है।
-नवीन कुमार, अधिकारी, रेलवे निर्माण विंग।
लाइट लगाने की जिम्मेदारी रेलवे की है। नगर पालिका केवल इसकी देखरेख और रखरखाव का कार्य कर सकती है। रेलवे की ओर से लाइट लगाने के बाद ही नगर पालिका इसकी देखरेख और मरम्मत की जाएगी।
-प्रवीन कुमार, सचिव, नगर पालिका जाखल।
जाखल रेलवे अंडरपा, जिसके निर्माण में अनियमितताओं का आरोप है। संवाद