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आपातकाल के दौर में जनसंघ और बाद में भाजपा का झंडा बुलंद करने वाली आवाज हुई खामोश

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आपातकाल के दौर में जनसंघ और बाद में भाजपा का झंडा बुलंद करने वाली आवाज सोमवार को खामोश हो गई। 1987 में फतेहाबाद से भाजपा विधायक रहे वयोवृद्ध नेता 86 वर्षीय बलबीर सिंह चौधरी का निधन हो गया। वह पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। शिवपुरी में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके पुत्र रणबीर सिंह चौधरी ने उन्हें मुखाग्नि दी।
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बेदाग छवि व मुखर आवाज के धनी रहे बलबीर सिंह चौधरी 1987 में सीपीएम नेता पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया को हराकर फतेहाबाद विधानसभा से भाजपा के पहले विधायक चुने गए थे। शुरू से ही आरएसएस कार्यकर्ता रहे बलबीर चौधरी जनसंघ की स्थापना से राजनीति में सक्रिय रहे। वह हिंदी आंदोलन 1957 के मातृभाषा सत्याग्रही भी रहे। कांग्रेस शासनकाल में लगे आपातकाल का उन्होंने मुखर विरोध किया था। मौजूदा विधायक दुड़ाराम, रतिया विधायक लक्ष्मण नापा, भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं चेयरमैन सुभाष बराला, पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, डीसी डॉ. नरहरि सिंह, एडीसी समवर्तक सिंह सहित क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने शोक व्यक्त किया।
कांग्रेस की रैली में घुसकर काले झंडे दिखाकर किया था आपातकाल का विरोध
सन 1975 में आपातकाल के दौर में जब राजनीतिक विरोधियों का सरकार उत्पीड़न करके उन्हें जेलों में ठूंस रही थी, तब उन्होंने फतेहाबाद के साथ-साथ हिसार में भी अपनी गतिविधियां जारी रखीं। उस दौरान हिसार में मधुबन पार्क के पास हुई कांग्रेस की रैली में घुसकर काले झंडे लहराते हुए आपातकाल का विरोध किया था। इसी विरोध के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा। हरियाणा के कद्दावर भाजपा नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री मंगलसेन के करीबी साथी रहे बलबीर सिंह ने हिंदी आंदोलन, राम जन्मभूमि आंदोलन, एसवाईएल सहित जनहित के कई आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाई।
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28 हजार 615 वोटों से जीतकर बने थे विधायक
1987 के विधानसभा चुनाव में बलबीर सिंह चौधरी ने तत्कालीन सीपीएम उम्मीदवार पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया को 28 हजार 615 वोटों से पराजित किया था। उस चुनाव में बलबीर सिंह को 43 हजार 479 वोट मिले थे। जबकि पृथ्वी सिंह को मात्र 14 हजार 864 वोट ही मिल पाए थे।
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