फतेहाबाद। गांव दरियापुर में हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिंथेटिक एस्ट्रो टर्फ फुटबाल मैदान अब बेसहारा हो गया है। इस फुटबाल मैदान का निर्माण करके लोक निर्माण विभाग द्वारा खेल विभाग को हैंडओवर करना था, लेकिन नौ साल बीतने के बाद भी ऐसा नहीं हो पाया है।
यहां पर राष्ट्रीय स्तर की फुटबाल अकादमी व छात्रावास भी बनना था। फुटबाल मैदान तो बन गया, लेकिन छात्रावास का कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है। अभी तक इसका बजट ही पारित नहीं हुआ है। देखरेख के अभाव में स्टेडियम का बुरा हाल बना हुआ है। स्टेडियम की दीवार कई जगह से टूट चुकी है। वहीं फुटबाल रैक अपने स्थान से दूर पड़ा है।
बता दें कि, वर्ष 2012 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार में फतेहाबाद के गांव दरियापुर में सिंथेटिक एस्ट्रो टर्फ फुटबाल मैदान की घोषणा की गई थी। तत्कालीन केंद्रीय खेल एवं युवा राज्य मंत्री अजय माकन ने इसका शिलान्यास किया था। यहां पर फुटबाल मैदान व छात्रावास का निर्माण किया जाना था। तीन साल बाद 2015 में तीन करोड़ की लागत से फुटबाल मैदान तो बन गया, लेकिन छात्रावास आज तक नहीं बना। जिस कारण यहां पर स्तरीय फुटबाल अकादमी भी नहीं बन पाई है। जिस मकसद से यह ग्राउंड अस्तित्व में लाया गया था वह तो दूर अब यहां किशोर एवं युवा क्रिकेट व अन्य खेलों की प्रैक्टिस करते हैं। इसके अलावा गांव के आसपास के बच्चे यहां पर आर्मी व बीएसएफ की तैयारी के लिए दौड़ भी लगाते हैं। सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत तत्कालीन बीजेपी सांसद सुनीता दुग्गल ने साल 2020 में गांव दरियापुर को गोद दिया लिया था। चार साल तक उन्होंने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
टूटा गोल पोस्ट, झुकीं ग्रिल
फुटबाल मैदान में गोल पोस्ट टूट गया है, वहीं इस मैदान के चारों ओर लगाए गए जाल गायब हो चुके हैं। सुरक्षा के लिए लगाई गई इसकी ग्रिल भी झुककर गिरने के कगार पर हैं। ज्ञात रहे कि जब इस फुटबाल मैदान का शिलान्यास हुआ था तो तत्कालीन मंत्री अजय माकन ने दावा किया था कि ये उत्तर भारत का एकमात्र आर्टिफिशियल फुटबाल टर्फ होगा जो सिंथेटिक एस्ट्रोटर्फ से बना हुआ है।
पंचायत ने काफी बार व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास
गांव दरियापुर के सरपंच प्रतिनिधि सुरेश कंबोज ने बताया कि कई बार ग्राम पंचायत ने व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास किए लेकिन प्रशासन व सरकार ने उनका किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं किया। खेल विभाग के अधिकारी कहते हैं कि यह स्टेडियम हमारे अंडर नहीं है। कई बार उपायुक्त महोदय से यहां व्यवस्था सुधारने के लिए मिल चुके हैं। विधायक ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
स्टेडियम को बनाकर छोड़ दिया गया, उसके बाद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आज तक इस स्टेडियम में कोई कोच नहीं आया। गांव के बच्चे खाली मैदान में क्रिकेट व अन्य खेल खेलते हैं। जो गलत है। यहां पर कोच आदि की व्यवस्था होनी चाहिए।
- सुभाष, निवासी गांव दरियापुर।
स्टेडियम में साफ-सफाई रहे, इसको लेकर गांव के युवाओं ने पंचायत के सहयोग से काफी प्रयास किए। लेकिन प्रयास सफल नहीं हो पाए। प्रशासन ने कोई सहयोग नहीं किया।
- बिट्टू, निवासी गांव दरियापुर।
जब यह स्टेडियम बन कर तैयार हुआ तो गांव के युवाओं में जोश था। काफी समय तक कोच का इंतजार किया। लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी कोच उपलब्ध नहीं हो पाया।
- लवकेश, निवासी गांव दरियापुर।
स्टेडियम का बुरा हाल हो चुका है। देखभाल और सुरक्षा न होने के चलते कई बार स्टेडियम में पशु बैठे रहते हैं। किसी भी प्रकार की देखभाल नहीं हो पा रही है। दीवारें तक टूट चुकी है।
- राजेंद्र, निवासी गांव दरियापुर।