फतेहाबाद। जिले में गेहूं की बिजाई का कार्य अंतिम चरण चल रहा है। परंतु जिले में अभी भी 20 फीसदी के करीब किसान ऐसे हैं जो डीएपी खाद के अभाव में बिजाई कार्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। जिले में पिछले 12 दिनों से खाद का स्टॉक खत्म है।
हालांकि जिले में गेहूं बिजाई का कार्य 60 फीसदी पूरा हो चुका है। बाकी बचे 40 फीसदी में से 20 फीसदी ऐसे किसान भी हैं जिनके पास डीएपी खाद तो है परंतु उनके खेतों में या तो धान का कटाई का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया या फिर वे बिजाई कार्य के लिए जमीन को तैयार नहीं कर पाए हैं।
बता दें कि जिले में रबी की फसलों की बुवाई सितंबर से शुरू होकर नवंबर माह के अंत तक होती है। गेहूं की बिजाई में किसानों को डीएपी खाद की भी आवश्यकता रहती है। लेकिन उसके बाद किसानों को डीएपी खाद की पूर्ति पूरी नहीं हो रही है। ऐसे में इस बार भी जिले के किसान डीएपी खाद की कमी से परेशान हैं।
जिले में 25,000 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है। जिसमें से किसानों को अभी तक 20,000 मीट्रिक टन खाद की मांग को पूरी हो चुकी है। ऐसे में 5,000 मीट्रिक टन खाद की मांग अभी भी बाकी है। ऐसे में किसानों को डीएपी खाद के स्थान पर एनपीके, टीएसपी व एसएसपी से ही काम चलाना पड़ रहा है। किसानों को कहना है कि एनपीके खाद डीएपी से महंगी है और टीएसपी खाद में नाइट्रोजन नहीं है। ऐसे में उनको टीएसपी खाद में अलग से नाइट्रोजन का खर्च बढ़ रहा है।
9 एकड़ जमीन में गेहूं की बिजाई करनी है। जिसके लिए 9 बैग डीएपी खाद की आवश्यकता है। लेकिन अभी तक मात्र 5 बैग ही डीएपी खाद मिल सकी है। वहीं अब बाकी बचे बैग के लिए पिछले 10 दिनों से खाद केंद्र का चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन अभी तक खाद नहीं मिल रही है।
-हरमेश किसान, गांव हिजरावां खुर्द
10 एकड़ में गेहूं की बिजाई करनी है। जिसके मुझे 10 बैग डीएपी खाद की जरूरत है, लेकिन खाद नहीं मिल रही है। ऐसे में मजबूरन एनपीके खाद की खरीद करनी पड़ी है। सरकार को गेहूं की बिजाई शुरू हाेने से पहले ही डीएपी खाद की पूर्ति करनी चाहिए थी।
-धर्मपाल, किसान गांव सोत्तर भट्टू।
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डीएपी खाद लेने के लिए दो बार लाइन में लग चुका हूं, लेकिन मेरी बारी आने से पहले ही खाद का खत्म हो जाती है। ऐसे में मुझे खाद नहीं मिल सकी है। जिससे मेरी गेहूं का बिजाई का समय निकल रहा है।
-मनु किसान, गांव गोरखपुर।
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डीएपी खाद नहीं मिलने से गेहूं की बिजाई में देरी हो रही है। ऐसे में टीसपी खाद की खरीद की है। वहीं जब डीएपी खाद मिलने की जानकारी लेने फतेहाबाद स्थित इफको खाद केंद्र पर पहुंचा तो वहां बताया गया कि अगले सप्ताह तक डीएपी खाद आएगी।
-धर्मपाल गांव कुम्हारिया।
- जिले में 25,000 मीट्रिक टन डीएपी खाद की जरूरत होती है। जिसमें से 20,000 मीट्रिक टन खाद का वितरण हो चुका है। किसान डीएपी खाद के वैकल्पिक तौर पर एनपीके और टीएसपी खाद का प्रयोग कर सकते हैं। टीएसपी खाद में प्रति एकड़ 20 किलो यूरिया खाद मिलाकर बिजाई कर सकते हैं। जब डीएपी खाद का स्टॉक आएगा तो उसे किसानों में वितरित कर दिया जाएगा।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।