आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर रवि उर्फ नोनू ने अपना फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए फतेहाबाद के गांव अहरवां को ही क्यों चुना? ऐसा इस गांव के बारे में हैंडलर रवि क्या जानता था, जिससे हरियाणा फतेहाबाद का गांव अहरवां उसके लिए सॉफ्ट टारगेट बन गया? इन सब सवालों के जवाब पुलिस ने जब ढूंढने शुरू किए तो जवाब में बड़ी वजह यह पता लगी कि इस गांव की 70 फीसदी से अधिक आबादी का पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ लगते जिलों में जान-पहचान है। खैर, पुलिस अब एक-एक कड़ी को जोड़कर फर्जी पासपोर्ट के अलावा हर एंगल से मामले में शामिल लोगों के बारे में छानबीन कर रही है।
पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के दौरान जब आतंकवाद का दौर था, उस समय की जानकारी रखने वाले रतिया के सामाजिक संगठन से जुड़े विकास कुमार बताते हैं कि पंजाब का बुल्ट नाम का आतंकवादी गांव अहरवां में छिपा था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां उसे तलाश करते हुए यहां पहुंची थी और बाद में उसका पीछा करते हुए गांव लांबा में उसे मार गिराया गया था। उस दौर में ऐसे लोग यहां के लोगों का विश्वास और अपनी जान-पहचान का हवाला देकर शरण लेने में कामयाब हो जाते थे।
आतंकी हैंडलर रवि उर्फ नोनू के लिए फर्जी पासपोर्ट का पता अहरवां में बनवाने का रस्ता हरमनप्रीत नाम से फर्जी पासपोर्ट जारी करवाने वाले शख्स ने तैयार किया। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि हरमनप्रीत नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाला अहरवां का यही शख्स तरनतारन जिले के रवि उर्फ नोनू को यहां करन नाम देने वाला शख्स है और यही शख्स हैंडलर को अच्छी तरह से जानता है। मुख्य संदिग्ध अहरवां के मनदीप के साथ कड़ी जोड़ने वाला शख्स भी यही है।
गांव अहरवां की बड़ी आबादी पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा वाले जिलों से माइग्रेट होकर यहां आई हुई है। इसलिए यहां रहने वाले लोगों की जान-पहचान और रिश्तेदारियां पंजाब के साथ लगते जिलों में है। यहां के लोगों का विश्वास और जान-पहचान का फायदा उठाकर आतंकी हैंडलर के लिए यह फर्जी पासपोर्ट बनाना आसान रहा। ग्रामीणों से हमारी अपील है कि वे ऐसे शातिर लोगों के चंगुल में न आएं। फिलहाल फर्जी पासपोर्ट केस में हर कड़ी को पुलिस जांच-परख रही है, जो भी संलिप्त हैं, उन्हें पकड़ा जा रहा है। - सुरिंद्र भोरिया, एसपी, फतेहाबाद।