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फर्जी पासपोर्ट मामला: आतंकी हैंडलर के लिए क्यों सॉफ्ट टारगेट बना फतेहाबाद का अहरवां?

Sun, 06 Feb 2022 12:20 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)

सार

अहरवां गांव की 70 फीसदी से अधिक रिश्तेदारी और जान-पहचान पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगते जिलों में है। यहां के लोगों को गवाही या दूसरे कामों के लिए आसानी से विश्वास में लेने का अंदाजा आरोपियों को था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर रवि उर्फ नोनू ने अपना फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए फतेहाबाद के गांव अहरवां को ही क्यों चुना? ऐसा इस गांव के बारे में हैंडलर रवि क्या जानता था, जिससे हरियाणा फतेहाबाद का गांव अहरवां उसके लिए सॉफ्ट टारगेट बन गया? इन सब सवालों के जवाब पुलिस ने जब ढूंढने शुरू किए तो जवाब में बड़ी वजह यह पता लगी कि इस गांव की 70 फीसदी से अधिक आबादी का पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ लगते जिलों में जान-पहचान है। खैर, पुलिस अब एक-एक कड़ी को जोड़कर फर्जी पासपोर्ट के अलावा हर एंगल से मामले में शामिल लोगों के बारे में छानबीन कर रही है।

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बता दें कि गांव अहरवां के पते पर पंजाब के तरनतारन जिले के रहने वाले रवि उर्फ नोनू का करन नाम से फर्जी पासपोर्ट का मामला सामने आया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के इनपुट के अनुसार रवि उर्फ नोनू आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हैंडलर है और वह आतंकियों को फंडिंग करता था। जम्मू-कश्मीर पुलिस के इनपुट के बाद पुलिस ने फर्जी पासपोर्ट के मामले में आरोपी रवि उर्फ नोनू के खिलाफ केस दर्ज करके जांच शुरू की।

इस केस में पुलिस ने सबसे पहले हैंडलर रवि के फर्जी पासपोर्ट की पुलिस वेरिफिकेशन पर बतौर गवाह हस्ताक्षर किए थे। पेशे से सतनाम सिंह राजमिस्त्री है। पुलिस जांच में सामने आया है कि अहरवां के सतनाम ने स्थानीय लोगों के कहने पर वेरिफिकेशन पर हस्ताक्षर कर दिए जबकि रवि उर्फ नोनू को असली नाम से जानता ही नहीं था।
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इस केस में दूसरी गिरफ्तारी मनीष की हुई, जिसने पैसों के लिए फर्जीवाड़ा करने की भूमिका निभाई, लेकिन उसने भी ये सब इसलिए किया क्योंकि वह अच्छी तरह जानता था कि स्थानीय लोगों को वह अपने विश्वास में ले लेगा। तीसरा सबसे बड़ा रोल रहा पुलिस का। जिन पुलिसकर्मियों ने वेरिफिकेशन की, वह भी स्थानीय लोगों के विश्वास पर की गई।

उन्होंने पेश किए गए सभी दस्तावेजों को गहराई से वेरिफाई करने की जरूरत नहीं समझी। आतंकी संगठन के हैंडलर के रोड मैप में गांव अहरवां अपनेपन के विश्वास मात्र से सॉफ्ट टारगेट बन गया और यहां के पते पर एक नहीं बल्कि दो फर्जी पासपोर्ट जारी करवा लिए। 

आतंकवाद के दौर में अहरवां में छिपा था बुलेट नाम का आतंकी, लांबा में मारा गया था

पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के दौरान जब आतंकवाद का दौर था, उस समय की जानकारी रखने वाले रतिया के सामाजिक संगठन से जुड़े विकास कुमार बताते हैं कि पंजाब का बुल्ट नाम का आतंकवादी गांव अहरवां में छिपा था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां उसे तलाश करते हुए यहां पहुंची थी और बाद में उसका पीछा करते हुए गांव लांबा में उसे मार गिराया गया था। उस दौर में ऐसे लोग यहां के लोगों का विश्वास और अपनी जान-पहचान का हवाला देकर शरण लेने में कामयाब हो जाते थे।

फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले हरमनप्रीत ने बनाया हैंडलर के लिए रास्ता

आतंकी हैंडलर रवि उर्फ नोनू के लिए फर्जी पासपोर्ट का पता अहरवां में बनवाने का रस्ता हरमनप्रीत नाम से फर्जी पासपोर्ट जारी करवाने वाले शख्स ने तैयार किया। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि हरमनप्रीत नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाला अहरवां का यही शख्स तरनतारन जिले के रवि उर्फ नोनू को यहां करन नाम देने वाला शख्स है और यही शख्स हैंडलर को अच्छी तरह से जानता है। मुख्य संदिग्ध अहरवां के मनदीप के साथ कड़ी जोड़ने वाला शख्स भी यही है।

अपनेपन और जान-पहचान से विश्वास में लेने का हुआ प्रयास : एसपी

गांव अहरवां की बड़ी आबादी पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा वाले जिलों से माइग्रेट होकर यहां आई हुई है। इसलिए यहां रहने वाले लोगों की जान-पहचान और रिश्तेदारियां पंजाब के साथ लगते जिलों में है। यहां के लोगों का विश्वास और जान-पहचान का फायदा उठाकर आतंकी हैंडलर के लिए यह फर्जी पासपोर्ट बनाना आसान रहा। ग्रामीणों से हमारी अपील है कि वे ऐसे शातिर लोगों के चंगुल में न आएं। फिलहाल फर्जी पासपोर्ट केस में हर कड़ी को पुलिस जांच-परख रही है, जो भी संलिप्त हैं, उन्हें पकड़ा जा रहा है। - सुरिंद्र भोरिया, एसपी, फतेहाबाद।

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