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बास्केटबाल के 90 पोल लगाए, कहीं कोर्ट ऊंचा-नीचा, कहीं खींच दी दीवार

Wed, 10 Aug 2016 11:29 PM IST
fatehabad
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जिले के 90 स्कूलों में बास्केट बाल कोर्ट शिक्षा विभाग की लापरवाही की भेंट चढ़ गए हैं। दरअसल फतेहाबाद में पंचायत युवा एवं क्रीड़ा अभियान (पायका) के तहत बास्केट बाल पोल सैट तो लगा दिए गए, लेकिन आज तक इन गांवों में बास्केटबाल कोर्ट का निर्माण नहीं हुआ है। - फोटो : amar ujala
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जिले के 90 स्कूलों में बास्केट बाल कोर्ट शिक्षा विभाग की लापरवाही की भेंट चढ़ गए हैं। दरअसल फतेहाबाद में पंचायत युवा एवं क्रीड़ा अभियान (पायका) के तहत बास्केट बाल पोल सैट तो लगा दिए गए, लेकिन आज तक इन गांवों में बास्केटबाल कोर्ट का निर्माण नहीं हुआ है। बिना कोर्ट ये पोल ना केवल धूल फांक रहे हैं, बल्कि कई जगह तो कंडम होने के कगार पर पहुंच गए हैं। प्रत्येक पोल सैट पर लगभग एक लाख रुपये का खर्च आया है। ऐसे में 90 लाख रुपये की लागत से जिले में बास्केट बाल पोल तो लगा दिए गए लेकिन आज तक एक भी कोर्ट पर पूरी तरह से खेल नहीं हो पाया। हैरानी इस बात की भी है कि जिन 90 जगहों पर ये पोल लगाए गए, उन जगहों से बास्केट बाल की एक भी टीम तैयार नहीं हुई।
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केंद्र सरकार की पायका स्कीम के तहत जिले के गांवों में बास्केटबाल के खिलाड़ी तैयार करने के लिए खेल विभाग ने 90 बास्केटबाल पोल सैट भेजे। प्रत्येक सैट की कीमत एक लाख रुपये बताई गई है। इस पोल सैट के लगने के बाद जमीन पर बास्केटबाल कोर्ट बनाई जानी थी। ये काम शिक्षा विभाग का ही था। विभाग ने बास्केट बाल कोर्ट के लिए सिर्फ पांच स्कूलों की डिमांड विभाग के निदेशक को भेजी। इनमें हिजरावांखुर्द, बनावाली, समैण, बोदीवाली, बनगांव और फतेहाबाद शामिल रहे। इन जगहों पर बास्केटबाल कोर्ट बना दिए गए। बाकी जगह ऐसे ही पोल गाड़ दिए गए। लेकिन ऊबड़-खाबड़ मैदान के चलते बास्केटबाल की प्रैक्टिस होनी असंभव है। अनेक गांवों में ये पोल सैट कंडम तक हो चुके हैं। कई पोलों के साथ तो पशु बांधे जाते हैं।

फतेहाबाद में कोर्ट बना तो उस पर बना डाली दीवार
योजना के तहत फतेहाबाद शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के मैदान में एक लाख रुपये खर्च कर पहले बास्केटबाल पोल लगाया गया और उसके बाद लगभग 3 लाख 73 हजार रुपये की लागत से बास्केटबाल कोर्ट का निर्माण करवाया गया। इससे पहले कि इस कोर्ट पर कोई खेल हो पाते, बीते दिनों प्राइमरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूल का रास्ता अलग अलग करने के लिए स्कूल प्रशासन ने 5 लाख की लागत से बने इसी बास्केट बाल कोर्ट पर दीवार बना डाली। यह सब खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के ठीक सामने हुआ है। वहीं, खेल विभाग ने आजतक इसकी औपचारिक शिकायत किसी उच्चाधिकारी को किया और ना ही एक-दूसरे विभागों से जवाब तलबी तक नहीं की गई।
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दो साल पहले 90 बास्केटबाल पोलसेट आए थे जो विभिन्न गांवों में लगवा दिए गए। बास्केटबाल कोर्ट का काम शिक्षा विभाग का था। कोर्ट ना बनने से बास्केट बाल पोल सैट का कोई औचित्य नहीं है। अनेक जगह यहां पशु बांधने की शिकायतें भी मिली हैं। प्रत्येक सैट पर एक लाख रुपये की लागत आई है।
सूबे सिंह, जिला खेल अधिकारी, फतेहाबाद

इन गांवों से कोई भी बास्केट बाल की टीम खेलने के लिए नहीं गई। जहां पर भी कोर्ट बनाने की डिमांड आई थी, वहां पर बनवा दिया गया। मेरे आने के बाद यहां पर दो कोर्ट बनवाई गई। उससे पहले के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। हां, पोल के खराब होने की सूचना मिली है।
मांगेराम, जिला सहायक शिक्षा अधिकारी (खेल)

स्कूल से प्राइमरी स्कूल को रास्ता दिया जाना था। इसलिए बास्केट बाल कोर्ट के बीच से दीवार खींचनी पड़ी। जितनी जगह में दीवार आई है, उतनी जगह साइड में कोर्ट बनवाकर दी जाएगी।
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कृष्ण कुमार, प्रिंसिपल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, फतेहाबाद

प्राइमरी और सीनियर सैकेंडरी स्कूल के बीच गेट लगना था। पता नहीं दोनों स्कूल में क्या सहमति बनी कि दीवार खिंचवा दी। Ó
कुलदीप सिहाग, बीईओ, फतेहाबाद ।
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