धुंध और ठंड के इस मौसम में वाहन चलाते समय, सड़क पर पैदल चलते समय बेहतर रहेगा कि आप खुद अपनी जान बचाने के लिए सजग रहें, कहीं अगर जिला प्रशासन के भरोसे बैठे रहे तो हादसा आपसे बहुत ज्यादा दूर नहीं है। कम से कम धुंध के इस मौसम में हादसों को टालने में अफसरी लापरवाही देखकर तो यहीं लग रहा है। शहर के अंदर प्रवेश करने वाले किसी भी इंट्री-एक्जिट प्वाइंट पर किसी प्रकार की कोई सुरक्षा या साइन बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं जबकि धुंध के चलते वाहन चालक अक्सर गलत साइड गाड़ी ले आते हैं। सबसे ज्यादा हादसों का डर तो मिनी बाईपास और एमएम कालेज मोड़ पर है, जहां ना तो सड़क पर कोई सफेद पट्टी है और ना ही हादसों को रोकने के लिए किसी प्रकार का कोई साइन बोर्ड।
पिछले तीन माह में तीन मौतें
नेशनल हाइवे से रतिया मुड़ने के लिए एमएम कॉलेज मोड़ से नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे आपस में मिलते हैं। इस मोड़ पर किसी प्रकार के कोई साइन बोर्ड या अन्य सुरक्षा यंत्र नहीं लगाए गए हैं। ट्रैफिक को कंट्रोल करने वाले कर्मचारी भी कभी-कभार ही या दिखते हैं। रतिया रोड से नेशनल हाइवे पर आने के लिए एक ही सड़क पर तीन मोड़ हैं और तीनों मोड़ पर किसी प्रकार का कोई ब्रेकर नहीं दिया गया है। ऐसे में वाहन चालक को स्पीड कम करने का मौका ही नहीं मिलता और नेशनल हाइवे से आते वाहन अक्सर दुर्घटना का सबब बनते हैं। पिछले तीन माह में ही तीन मौतें हो चुकी हैं, जिनमें शहर के पूर्व पार्षद राजू मुंजाल भी शामिल हैं।
रतिया चुंगी चौराहे पर खरे नहीं उतरते सुरक्षा मानक
रतिया चुंगी एरिया शहर के सबसे व्यस्ततम इलाके में एक है। हांसपुर-नागपुर और रतिया साइड पर पड़ने वाले तकरीबन दो दर्जन गांवों को फतेहाबाद से जोड़ने का यही इकलौता रास्ता है, लेकिन सुरक्षा मानक यहां भी खरे नहीं उतरते। कहने को तो यहां अक्सर पुलिस नाका लगा होता है, लेकिन नाके पर पुलिसकर्मी हर वक्त हों, ये जरूरी नहीं। साथ ही यहां पर दौलतपुर रोड और रतिया रोड, दोनों ही तरफ ब्रेकर की भी खास व्यवस्था नहीं है। ऐसे में हादसों को रोकने की बजाए ये परिस्थितियां हादसों को निमंत्रण देती ज्यादा दिख रही हैं।
मिनी बाईपास के साथ-साथ पांच फुट की गहराई
हिसार रोड़ से बिना शहर में आए भट्टू-बीघड़ आदि के लिए जाने वाला मिनी बाईपास भी इस धुंध के मौसम में कम खतरनाक नहीं है। हिसार चुंगी से शुरू होकर बीघड़ रोड, भट्टू रोड़, खैरातीखेड़ा रोड होते ये रास्ता सिरसा रोड़ पर नई अनाज मंडी के पास से निकलता है। ऐसे में तकरीबन 5-6 किलोमीटर लंबे इस मिनी बाईपास के एक तरफ तो खाले की दीवार है जो सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है लेकिन दूसरी ओर खाली छोड़ दी गई है। मिनी बाईपास के दूसरी ओर लगभग पांच से छह फुट तक गहराई है। साथ ही इस सड़क पर ना तो रोशनी का पर्याप्त प्रबंध है और ना ही सड़क के बीच घूमने वाले आवारा पशुओं से सुरक्षा का कोई प्रबंध। ऐसे में मिनी बाईपास पर वाहन चलाते समय भी आपको खुद ही सावधानी रखनी होगी।
कमियों को करेंगे दूर, लोगों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता : एएसपी
इस बारे में बात करने पर एएसपी गंगाराम पूनिया ने कहा कि अगर कहीं कोई कमी है तो उसे दूर किया जाएगा। लोगों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। दरअसल सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की नहीं बल्कि कई विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी बातचीत की जाएगी।