जाटों ने जैसे ही मुनादी करके भीड़ जुटाने का प्रयास किया तो प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के उद्देश्य से सीआरपीएफ की दो कंपनियों को फतेहाबाद बुला लिया गया है। सेना बल के साथ पुलिस अधिकारियों ने फ्लैग मार्च भी निकाला।
एसपी ओपी नरवाल ने लोगों से आपसी भाईचारा एवं शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की है। उधर, ढाणी गोपाल चौपटा पर धरनास्थल पर 7 दर्जन के करीब प्रदर्शनकारी पहुंचे। हालांकि मुनादी का जो प्रभाव प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों के पसीने छुटा रहा था, उसका लेशमात्र भी असर दिखाई नहीं दिया। जिससे मात्र निरीक्षक विमला देवी और कुलदीप सिंह ने सुरक्षा की कमान संभाले रखी। जबकि विगत दिनों में एसपी, एएसपी तथा एसडीएम भारी पुलिस बल के साथ स्वयं मौके पर मौजूद रहते थे।
मुनादी में उड़ाई जा रही हैं कानूनी की धज्जियां
प्रशासन ने भले ही जाट आरक्षण आंदोलन में मुनादी कराने की अनुमति दे दी हो। मगर जिन पांच शर्तों के आधार पर मंजूरी दी गई है, उनकी सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रचार करने वाली गाड़ी में गीतकार केडी के भड़काऊ बोल एवं गाने प्रशासनिक नियमों को धता बता रहे हैं। लोगों को उत्तेजित करने वाले इस आडियो का प्रसारण पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने हो रहा है, लेकिन सभी खामोश हैं।
258 गांवों में से महज 85 प्रदर्शनकारी
जिला फतेहाबाद में एकमात्र धरना अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा दिया जा रहा है। जिसके 258 गांवों में से महज 85 प्रदर्शनकारी की अपनी मांगे मनवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ढाणी गोपाल चौपटा पर धरना जमाए बैठे प्रदर्शनकारियों को देखकर स्पष्ट हो रहा है कि अब क्षेत्र के जाट वर्ग में जागरूकता आ रही है। इसका ताजा उदाहरण गत बुधवार को धरनास्थल पर तैनात पुलिस कप्तान ओपी नरवाल से मिलने पहुंचे दर्जनों लोगों ने पेश किया। उक्त लोगों ने नरवाल को बताया था कि वे धरने के पक्षधर नहीं हैं, ऐसे में उनका प्रदर्शनकारियों से कोई सरोकार नहीं है।
गुप्तचर विभाग से खफा प्रदर्शनकारी
जाट आरक्षण मामले को लेकर पल-पल की जानकारी हाईकमान तक पहुंचा रहे गुप्तचर विभाग के कर्मचारियों से प्रदर्शनकारी खासे नाराज दिखाई दे रहे हैं। वे अपने पास भी उनको आने-जाने से रोक रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गुप्तचर विभाग के उपरोक्त कर्मचारी उनकी पहचान एवं नाम पता जुटाने में लगे हैं। जिसके बाद पुुलिस प्रदर्शनकारियों को नोटिस दे रही है। इसलिए अब गुप्तचर विभाग एवं सिविल कर्मचारियों को धरने के नजदीक आने से रोक रहे हैं।