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महिला हेल्पलाइन पर आई शिकायतों में केवल 13 फीसदी ही दर्ज हुए केस, बाकी में हो गया समझौता

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महिला हेल्प लाइन पर आई शिकायतों में केवल 13 फीसदी ही दर्ज हुए केस, बाकी में हो गया समझौता
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। जिले में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। जहां साल 2017 मेें आए दिन करीब चार महिलाएं किसी ना किसी कारण से प्रताड़ना का शिकार हो रही थी, वहीं वर्ष 2018 में यह आंकड़ा लगभग दोगुना हो गया है। जिला महिला हेल्प लाइन पर के आंकड़ों से इसकी पुष्टि हुई है। साल 2018 के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो जिले की रोजाना 6 महिलाएं किसी ना किसी कारण से प्रताड़ित होती हैं तथा महिला हेल्प लाइन पर शिकायत करने पर मजबूर हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह भी है कि अधिकतर मामलों में समझौता हो जाता है या खुद पीड़िता ही यह लिखकर दे देती है कि वह कोई कार्रवाई नहीं चाहती। बीते वर्ष के महिला हेल्पलाइन के आंकड़ों के अनुसार कुल 2290 महिलाओं ने फोन कर अपनी प्रताड़ना के बारे में बताया लेकिन पूरे साल में केवल 268 ही मामले दर्ज हुए। बाकि के मामलों में या तो समझौता हो गया या खुद पीड़िताओं ने ही लिखित में बयान दे दिए कि वह कोई कार्रवाई नहीं करवाना चाहती।
घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के अधिक केस
महिला हेल्प लाइन पर आई कुल शिकायतों में अधिकतर शिकायतें ऐसी है जिनमें पीड़िता या तो घरेलू कलह से प्रताड़ित है या फिर ससुराल पक्ष के लोग उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करते हैं। इसके अलावा छेड़छाड़ व यौन उत्पीड़न के भी कई मामले सामने आए हैं।
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2017 में दर्ज हुए थे केवल 56 केस, 2018 में दर्ज हुए 268
साल 2017 में महिला हेल्प लाइन 1418 शिकायतें आई थी जिनमें से केवल 56 केस दर्ज हुए थे। लेकिन साल 2018 में यह आंकड़ा पांच गुणा बढ़ गया। बीते वर्ष में महिला हेल्प लाइन पर 2290 महिलाओं ने शिकायत की जिनमें से 268 केस दर्ज हुए तथा अन्य शिकायतों में या तो समझौता हो गया या पुलिस काउंसिलिंग के बाद विवाद का निपटारा हो गया।
महिला हेल्प लाइन नंबर 1091 की कार्यप्रणाली
1091 महिला हेल्प लाइन नंबर है। ये नंबर पूरी तरह टोल फ्री है। किसी भी समस्या के समय महिलाएं अपने मोबाइल या लैंडलाइन से 1091 नंबर डायल करेंगी तो उनकी कॉल महिला थाने में स्थित कंट्रोल रूम में जाएगी। यहां बैठी महिला कांस्टेबल आपरेटर महिला से उसका नाम, पता, मोबाइल नंबर के अलावा उसके सामने आ रही समस्या और फिलहाल वो महिला किस लोकेशन पर है, ये सारी डिटेल्स पूछकर तुरंत संबंधित थाना इंचार्ज को सूचित करती है। इसके बाद संबंधित थाना इंचार्ज उस शिकायतकर्ता महिला के पास आईओ भेजता है जो मामले की जांच करता है। इस दौरान संबंधित थाने से वापस महिला कंट्रोल रूम में फोन आता है, जिसमें महिला को अलॉट किए गए आईओ का नाम, मोबाइल नंबर भी बताया जाता है।
अधिकतर मामलों में हो जाता है समझौता
महिला हेल्पलाइन के आंकड़ों के अनुसार बीते साल में 2290 शिकायतों आने के बाद भी केवल 268 केस दर्ज होने का कारण जब महिला थाना प्रभारी मंजू रानी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हेल्प लाइन पर आने वाले अधिकतर मामलों में या तो पंचायतों के माध्यम से या पुलिस काउंसिलिंग के माध्यम से समझौता हो जाता है। इसके अलावा कई मामलों में खुद पीड़िता भी बयान दे देती है कि वह कोई कार्रवाई करवाना नहीं चाहती।
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साल 2018 में महिला हेल्प लाइन पर दर्ज हुए केस
माह केस दर्ज
जनवरी 17
फरवरी 28
मार्च 29
अप्रैल 23
मई 10
जून 18
जुलाई 19
अगस्त 33
सितंबर 30
अक्तूबर 25
नवंबर 21
दिसंबर 14
कुल 268
महिला हेल्प लाइन पर शिकायतों व दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़ने के पीछे का कारण महिलाओं में इसको लेकर आई जागरूकता है। पहले अधिकतर मामले तो पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते थे, लेकिन महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के मुकदमे बढ़े हैं तो उनके खिलाफ कार्यवाही का आंकड़ा भी बढ़ा है। पुलिस विभाग पूरी तरह इसके लिए गंभीर है और मैं खुद भी इस पर नजर रखकर कई बार शिकायतकर्ता से बात भी करता हूं ताकि पता चलता रहे कि हमारी कार्यवाही सही दिशा में जा रही है या नहीं।
- दीपक सहारण, पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद ।
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