फतेहाबाद । 27 नवंबर 2015, यह वह तारीख थी जब जिले के गांवों में नशे का कारोबार को लेकर फतेहाबाद की तत्कालीन एसपी संगीता कालिया और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के बीच की तकरार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बनी थी। चार साल बीतने के बाद स्थितियां पहले से बदतर हुई हैं। संगीता कालिया-अनिल विज के एपीसोड के बाद ये जरूर हुआ कि रतिया-टोहाना के पंजाब बॉर्डर को लेकर फतेहाबाद पुलिस संजीदा हुई और इस एरिया में लगातार नशे पर लगाम लगाने के प्रयास किए लेकिन जिले के दूसरे छोर पर राजस्थान सीमा को खुला छोड़ दिया है। जिले की सीमा से लगता पहला राजस्थानी गांव महराणा है। इस गांव से लेकर भट्टू के गांवों से होते हुए जिला मुख्यालय तक का सफर तकरीबन 37 किलोमीटर का है। एंटी ड्रग्स डे से एक दिन पूर्व ‘अमर उजाला’ ने मंगलवार को राजस्थान सीमा और पंजाब बॉर्डर पर नशे को लेकर पुलिस की चौकसी को लेकर विशेष पड़ताल की।
राजस्थान सीमा से जिला मुख्यालय तक सात गांव, एक भी पुलिस नाका नहीं
मंगलवार को ‘अमर उजाला’ की पड़ताल के दौरान ये सामने आया कि भट्टू पुलिस राजस्थान सीमा से नशे को लेकर बिल्कुल बेपरवाह है। राजस्थानी गांव महराणा से लेकर फतेहाबाद जिला मुख्यालय तक के 37 किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 7 गांव आते हैं। इसमें रामसरा, ढाबीकलां-ढाबीखुर्द, भट्टू, ढिंगसरा, मानावाली, भोड़ियाखेड़ा शामिल हैं। इसके अलावा फतेहाबाद शहर का एरिया भी भोड़ियाखेड़ा से ही शुरू होता है लेकिन 37 किलोमीटर के इस इंटर स्टेट रोड पर एक भी पुलिस नाका नहीं मिला। गांव रामसरा के पास पुलिस बैरिकेड्स जरूर सड़क के साइड में रखे हुए थे। इसके बाद के सभी गांवों में कहीं एक पुलिसकर्मी तक बाइक या जिप्सी पर गश्त करता हुआ नहीं दिखा।
पंजाब बॉर्डर के ब्राह्मणवाला गांव में खाली मिले बेरिकेड्स
दूसरी ओर जिले के दूसरे कोने में स्थित रतिया के गांव ब्राह्मणवाला से आगे का एरिया पंजाब है। ऐसे में पुलिस विभाग ने ब्राह्मणवाला गांव में विशेष पुलिस चौकी स्थापित की हुई है। जबकि फतेहाबाद जैसे इलाके में जहां नशा इतना संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। उस इलाके में पंजाब बॉर्डर का सबसे पहला गांव ब्राह्मणवाला में सबसे अधिक जांच पड़ताल होनी चाहिए। मंगलवार को ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में ठीक इससे उलटा होते दिखा। पंजाब साइड से आने वाले बाइक और गाड़ियां बिना किसी रोकटोक के हरियाणा क्षेत्र में प्रवेश पा रहे थे। उनकी तलाशी तो दूर, पंजाब बॉर्डर पर बनी ब्राह्मणवाला पुलिस चौकी के बाहर बेरिकेड्स पर कोई पुलिसकर्मी ही नहीं दिखा। पुलिस बेरिकेड्स पर सुरक्षा जांच की बजाए पुलिसकर्मी चौकी के अंदर बैठे नजर आए।
पंजाब से हो रही नशे की खेप, पुलिस अनजान
जिले के अधिकारी फतेहाबाद में बढ़ते नशे के पीछे पंजाब से आने वाले नशे को बड़ा कारण मानते हैं लेकिन पंजाब बार्डर पर ही ऐसी कागजी पुलिसिया सुरक्षा अपने आप में कई सवाल खड़े करती है और कई सवालों के जवाब दे भी देती है।
पांच माह ढाई करोड़ की हेरोइन के साथ दो भाई किए थे काबू
आज तक पंजाब बॉर्डर और इधर से आने वाले रास्तों पर फोकस रखने वाली फतेहाबाद पुलिस को चार-पांच माह पहले उस समय बड़ा झटका लगा था जब पंजाब पुलिस ने भट्टू के गांव पीलीमंदौरी में छापा मारकर रातोंरात दो भाइयों को काबू कर ले गई थी और उनके कब्जे से ढाई करोड़ की हेरोइन बरामद हुई थी। पीलीमंदौरी गांव राजस्थान से बहुत ज्यादा दूर नहीं है। रतिया-टोहाना के गांवों से पुलिस बामुश्किल 5-5 ग्राम की हेरोइन ही पकड़ती आई है।
एक से 20 जून तक नशे के खिलाफ पुलिस की मुहिम
1. एक किलो अफीम
2. 75 किलो चूरापोस्त
3. 225 ग्राम हेरोइन
4. 25 बोतल कफ सिरप
5. साढ़े 22 हजार नशे की गोलियां
6. नशा तस्कर के घर से 8 लाख की रिकवरी
राजस्थान के साथ लगते भट्टू के गांव सिंथेटिड ड्रग्स को लेकर संवेदनशील नहीं है। इस कारण वहां पर नियमित नाकेबंदी नहीं की जाती, लेकिन गुप्त सूचना के आधार पर समय-समय पर नाकाबंदी और अन्य काम किए जाते हैं। पंजाब में नशे का काफी प्रभाव है ऐसे में रतिया इलाके में तीन चौकियां स्थापित की गई हैं, स्पेशल स्टाफ है, सिटी पुलिस है। वो अपने तरह से नियमित जांच पड़ताल करती रहती हैं। इस कारण वहां पुलिस का फोकस ज्यादा नजर आता है। जहां तक नाके पर पुलिसकर्मियों की गैर मौजूदगी की बात है, कई बार गर्मी या अन्य कारणों से भी पुलिसकर्मी को इधर-उधर होना पड़ता है। नशे की रोकथाम को लेकर हमारे लिए पूरा जिला एकसमान है और हम इसके लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं।