भूना। गांव बोस्ती मेें जमीनी विवाद के चलते दर्जनभर लोगों ने अनुसूचित जाति की पुरुषों और महिलाओं को खेतों में दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। आधा दर्जन गाड़ियों में आए लोगों ने विवादित जमीन को 6 ट्रैक्टरों की मदद से 4 एकड़ मेें खड़ी ज्वार व सब्जियों तथा नरमे की फसल को तहस-नहस कर दिया। ट्रैक्टरों से खुदाई करके कब्जा अपने हक मेें ले लिया। इससे पूर्व विरोध कर रही काश्तकार 4 महिलाओं और चार पुरुषों पर हमलावरों ने बेरहमी से खेतों में लाठियां बरसाई और भगाकर खेतों से बाहर निकाल दिया। संघर्ष के बाद करीब आधा घंटा तक घायल महिलाएं सड़क पर तड़फती रही। घायल हुए अनुसूचित जाति के लोगों को उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल कराया है। हालांकि घटना के एक घंटे बाद पुलिस की महज पीसीआर गाड़ी ने आकर खानापूर्ति की। पुलिस की मौजूदगी में ही विवादित जमीन पर ट्रैक्टर चलते रहे। पुलिस ने बहरहाल घायलों के बयान दर्ज किये है।
बोस्ती निवासी अनुसूचित जाति के धर्मपाल व रामस्वरूप रंगा ने बताया कि सनियाना रोड पर स्थित 12 एकड़ जमीन पर वह पिछले कई वर्षों से लगातार काश्त करते आ रहे हैं। जीमन की गिरदावरी भी उनके नाम चली आ रही थी। इस जमीन से उसके परिवार का पालन-पौषण हो रहा था। उन्होंने बताया कि रविवार की सुबह उन्हें सूचना मिली कि खेत में फसल को बर्बाद किया जा रहा है। जब उन्होने मौके पर पहुंचकर विरोध किया तो ताक में बैठे दर्जनों लोग हथियारों से लैस थे जिन्होंने खेत में जाते ही उन पर ताबड़ तोड़ हमला कर दिया। अनुसूचित जाति के लोगों को आरोप है कि कब्जा लेने आए लोगों ने 4 महिलाओं को जबरन खेत में दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। जिसमेेें भादो देवी, कविता देवी, मुकेश देवी व सुदेश रानी शामिल हैं। वहीं रामस्वरूप, राममेहर, धर्मपाल तथा सुमित को गंभीर चोटेें आई हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि कब्जा लेने से पहले ही उक्त लोगों ने पुलिस के साथ सांठगांठ कर ली थी जिसके चलते बार-बार सूचना देने के बाद भी पुलिस एक घंटा बाद पहुंची और महज खानापूर्ति करके चलती बनी। जिस समय पुलिस मौके पर पहुंची वहां पर 4 दर्जन से अधिक लोग हथियारों से लैस मौके पर थे फिर भी पुलिस ने कोई संज्ञान नहीं लिया।
उधर राजीव बतरा का आरोप है कि वे उपरोक्त जमीन के मालिक हैं और विभिन्न अदालतों में मामला जाने के बाद उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। फिर भी उन्होंने पंचायत का मान-सम्मान करते हुए उक्त जमीन में से 4 एकड़ जमीन काश्तकार धर्मपाल को देने चाही थी मगर धर्मपाल 12 एकड़ पर ही मालिकाना हक जता रहा था। बतरा ने बताया कि उक्त जमीन पर वे वर्ष 1980 से खेती करते आ रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने अपनी 12 एकड़ जमीन सुभाष भिरड़ाना को ठेेके पर दी थी। जो आज जमीन पर बिजाई करने आया तो बोस्ती के धर्मपाल व रामस्वरूप पक्ष के लोगों ने हमला कर दिया। जिसके चलते दोनों पक्षों में संघर्ष हुआ है। इस संघर्ष में राजीव बतरा के बेटे ऋषि बतरा को चोट आई है। जिन्हें उपचार के लिए टोहाना के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पहले भी हो चुका है कई बार संघर्ष
बता दें कि फतेहाबाद के देवराज बतरा के परिवार की बोस्ती गांव में करीब 250 एकड़ जमीन है। जिसको लेकर अनुसूचित जाति के 9 लोगों को कुछ जमीन सरप्लस हो गई थी। उसी के चलते बतरा परिवार ने 8 अनुसूचित जाति के परिवारों के साथ समझौता कर लिया और उनके साथ सहमति बना ली। परंतु काश्तकार धर्मपाल 12 एकड़ जमीन पर स्वयं का हक जता रहा था। मामला कई वर्षों तक निचली अदालतों से लेकर उच्च अदालत तक भी चला। जिसमें फैसला बतरा परिवार के हक मेें होता रहा। मामले को रफा-दफा करने के लिए कई बार पंचायतें भी हुई। जिसमें राजीव बतरा 4 एकड़ जमीन धर्मपाल के नाम करवाने पर सहमत हो गए थे मगर काश्तकार धर्मपाल इससे संतुष्ट नहीं था और 12 एकड़ पर कब्जा करना चाह रहा था।
क्या कहते हैं जांच अधिकारी
एएसआई ओम प्रकाश जांगड़ा ने बताया कि कुछ दिन पहले भी इन दोनों पक्षों के बीच झगड़ा हुआ था जिसमें धर्मपाल पक्ष के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि रविवार को भी जमीन को लेकर दोनों गुटों में झगड़ा हुआ है जिसमें अनुसूचित जाति के लोगों को चोटें आई हैं। उनके बयान लेकर आगामी कार्रवाई की जाएगी।