फतेहाबाद। जिन सरकारी भवनों से लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित सेवाओं की उम्मीद रहती है उन्हीं जर्जर इमारतों में कर्मचारी रोजाना काम करने को मजबूर हैं। छतों से टपकता पानी और गिरता प्लास्टर कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
शहर में बिजली निगम के जेई कार्यालय, बिजली बिल जमा करने के कार्यालय, मत्स्य विभाग के भवन और मार्केट कमेटी की रिहायशी कॉलोनी समेत कई सरकारी भवनों की हालत खराब हैं। इन भवनों को जर्जर घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद यहां कामकाज और आवासीय गतिविधियां जारी हैं।
बारिश के दिनों में स्थिति और चिंताजनक हो जाती है। कई भवनों की छतों से पानी टपकता है। दीवारों और छतों का प्लास्टर भी कई बार गिर चुका है। ऐसे में कर्मचारियों को जरूरी सरकारी काम निपटाने के साथ हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहता है। कार्यालयों में काम से पहुंचने वाले लोगों की सुरक्षा भी चिंता का विषय है।
विडंबना यह है कि जर्जर घोषित भवनों को हटाकर नए भवन बनाने की प्रक्रिया अब तक आगे नहीं बढ़ पाई है। कुछ इमारतें इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि उनमें बैठना जोखिम से खाली नहीं है। फिर भी रोजाना इन्हीं भवनों में सरकारी कामकाज चलता है। लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों के लिए सुरक्षित भवन उपलब्ध करवाना जरूरी है। जर्जर इमारतों की जगह नए भवन बनने से कर्मचारियों और आमजन को राहत मिल सकेगी।
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जर्जर भवन में जारी मत्स्य विभाग
सभी जर्जर भवनों में से सबसे खराब स्थिति मत्स्य विभाग के भवन की है। विभाग के पास खुद का भवन नहीं है। मत्स्य विभाग को एसडीएम क्वार्टर के खाली पड़े भवन में शिफ्ट कर गया है। हालांकि यह व्यवस्था भी स्थायी समाधान नहीं है। विभाग को पुराना भवन जर्जर में शिफ्ट करने के कारण यहां कर्मचारियों के लिए काम करना खतरनाक साबित हो रहा है। भवन की छत से कई बार प्लास्टर गिर चुका है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने से भवन में रखा पुराना रिकॉर्ड को बचा पाना मुश्किल हो जाता है।
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50 वर्ष से अधिक पुराना हो चुका बिजली निगम का भवन
बिजली निगम कार्यालय का निर्माण साल 1970 में हुआ था। उस समय के बने हुए भवन में निगम का कार्यालय जारी है। बिजली निगम में हर रोज हजाराें लोगों का आवागमन होता है। ऐसे में जर्जर भवन से हादसे की आशंका बनी हुई है। इसको लेकर निगम में बिजली बिल जमा करवाने पहुंचे उपभोक्ता राजबीर, संदीप, रेनु और सुभाष ने बताया कि जर्जर भवनों को तोड़कर नया बनाया जाए ताकि किसी भी कर्मचारी व उपभोक्ता को नुकसान न पहुंचे। वहीं इस बारे में निगम के जेई देवीलाल ने बताया कि जब किसी सरकारी भवन को जर्जर घोषित कर दिया जाता है तो उसे खाली कराकर नया भवन बनाने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए लेकिन यहां जर्जर भवनों को घोषित किए जाने के बाद भी नए भवनों के निर्माण के लिए एस्टीमेट तक नहीं बन सका है।
:: सरकारी कार्यालयों को जर्जर घोषित करवाने के लिए विभाग हो सूचना मिलती है। उसके बाद लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी भवन की स्थिति देखकर जर्जर घोषित करने पर विचार करते हैं। विभाग की ओर से समय-समय पर भवनों की स्थिति की जांच की जाती है।
- गुलशन कुमार, एसडीओ, लोक निर्माण विभाग, फतेहाबाद।
मत्स्य विभाग के कार्यालय छत से गिरा प्लास्टर व बाहर निकला सरीया। संवाद
मत्स्य विभाग के कार्यालय छत से गिरा प्लास्टर व बाहर निकला सरीया। संवाद
मत्स्य विभाग के कार्यालय छत से गिरा प्लास्टर व बाहर निकला सरीया। संवाद