फतेहाबाद। शहर के पुराने बस स्टैंड के सामने पुराने शौचालय को तोड़कर नए शौचालय का निर्माण कार्य पिछले दस महीनों से अटका पड़ा है। मात्र एक से डेढ़ महीने में पूरे होने वाले कार्य को ठेकेदार ने लटका कर छोड़ दिया है। मात्र कुछ ही दूरी पर बैठने वाले नगर परिषद के अधिकारी भी इसकी सुध नहीं ले रहे हैं। नतीजतन, रोजाना लोकल रूटों की बसों में यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों और आसपास के सैकड़ों दुकानदारों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सबसे अधिक समस्या महिलाओं को होती हैं। लोगों ने इस शौचालय के निर्माण कार्य को जल्द पूरा करवाने की मांग की है, ताकि परेशानी का समाधान हो सके।
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मैं पिछले पांच वर्षों से पुराने बस अड्डे के सामने हेयर सैलून चलाता हूं। इस स्थान पर पहले एक शौचालय होता था, जिसको तोड़कर नए शौचालय का निर्माण कार्य शुरू किया था। मगर दस महीने से काम अटका पड़ा है। पुरुष यात्री मजबूरन दीवार के सहारे खड़े होकर लघु शंका करते हैं, जिसके कारण महिलाओं और छात्राओं को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।
नरेश कुमार, सैलून संचालक
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मैं पुराने बस स्टैंड के पास जूस की रेहड़ी लगाता हूं। यहां सारा दिन बदबू से जूझना पड़ता है। वहीं, महिलाओं को शौच की सबसे ज्यादा परेशानी होती है। यहां आने वाले यात्रियों को बदबू के कारण मुंह ढककर निकलना पड़ता है। हर रोज हजारों लोगों को परेशान होना पड़ता है। प्रशासन व संबंधित अधिकारियों को समस्या का स्थायी समाधान करवाना चाहिए।
शिवम, रेहड़ी चालक
मैं फतेहाबाद में ऑटो चलाता हूं। पिछले दस महीनों से देख रहा हूं कि शौचालय का निर्माण कार्य बंद पड़ा है। इस कारण बसों में यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नगर परिषद प्रशासन शौचालय जैसी छोटी सी सुविधा भी लोगों को नहीं दे पा रहा है। खुले में शौच मुक्त अभियान की भी यहां पोल खुल रही है।
प्रेम कुमार, ऑटो चालक
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पुराने बस स्टैंड के पास पिछले काफी सालों से चाय की दुकान कर रहा हूं। पहले तो यहां पर एक शौचालय था। मगर उसके हालात भी खराब थे। अब 10 महीने से नया शौचालय बनाने का काम अधर में लटका पड़ा है। बाहर की दीवारें तो बना दी गई हैं। मगर अंदर टाइलें लगाने का काम पूरा नहीं हुआ है। इस कारण यह शौचालय शुरू नहीं हो पा रहा है।
दीपू, चाय विक्रेता