तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसानों के धरने में शामिल होने के लिए गांव धारसूल से महिलाओं का जत्था रवाना हुआ। आंदोलन को तेज गति देने के लिए न केवल पुरुष किसान बल्कि महिलाओं की भी भागीदारी बढ़ने लगी है।
सोमवार को रवाना हुई महिलाओं के साथ बच्चे भी थे। यह सभी एक कैंटर में सवार होकर अपने साथ सब्जियां लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुई। दिल्ली के लिए रवाना हुई महिलाओं का कहना था कि कृषि व जमीन बचाने के लिए यह लड़ाई सभी की है। किसानी संघर्ष में महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जब तक ये कृषि कानून वापस नहीं लेती, वे तब तक पीछे नहीं हटेंगी। महिलाओं ने कहा कि यदि वह आज चुप होकर घरों में बैठी रह जाएंगी तो भविष्य में इसका खामियाजा उनकी अगली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। इस दौरान गांव के युवा किसान राजेंद्र काला ने ग्रामीणों को दिल्ली पहुंचकर किसानों का समर्थन करने की अपील की।