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Fatehabad News: शहर का विकास अटका, नाराज वार्ड-1 के पार्षद ने डीसी को सौंपा इस्तीफा, देर शाम कार्यकारी अभियंता की नियुक्ति के आदेश जारी

Wed, 27 May 2026 10:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद। नगर परिषद के कार्यकाल का अब महज एक साल शेष रह गया है लेकिन पार्षदों और अधिकारियों की आपसी खींचतान के कारण शहर का विकास पूरी तरह से पटरी से उतर चुका है। वार्डों में विकास कार्य न होने से नाराज जनप्रतिनिधियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। गलियों के निर्माण की मांग के लिए करीब एक साल पहले धरने पर बैठने वाले वार्ड-1 के पार्षद राजकुमार ने डीसी डॉ. विवेक भारती को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि इस्तीफे की मंजूरी पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है। डीसी ने पार्षद से इस्तीफा देने के पीछे के मुख्य कारण भी पूछे हैं।
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वहीं देर शाम नगर निकाय के जारी आदेश के मुताबिक सिरसा के कार्यकारी अभियंता राकेश कुमार को फतेहाबाद नगर परिषद का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। नगर परिषद के पास धन की कोई कमी नहीं है लेकिन प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव में काम रुके हुए हैं। इस वित्त वर्ष की बजट रिपोर्ट के मुताबिक नगर परिषद के बैंक खाते में 84 करोड़ रुपये जमा हैं। पिछले वित्त वर्ष में 12 करोड़ के कामों का अनुमान था लेकिन परिषद केवल 9 करोड़ 36 लाख के काम ही करवा पाई। पिछले 4 महीनों में 3 बार कार्यकारी अभियंता बदले जा चुके हैं और पिछले 3 महीनों से यह महत्वपूर्ण पद पूरी तरह खाली पड़ा है जिससे तकनीकी मंजूरियां और टेंडर प्रक्रिया लटकी हुई है।
नगर परिषद के ये 5 बड़े प्रोजेक्ट्स पड़े हैं ठप
साइकिल ट्रैक का निर्माण
शहर के मुख्य चौकों का सुंदरीकरण
शहर का मुख्य स्वागत द्वार
आधुनिक ऑडिटोरियम का निर्माण
आजाद नगर में कम्युनिटी सेंटर का निर्माण
तीन बार धरने पर बैठ चुके हैं पार्षद
इस्तीफा देने वाले पार्षद राजकुमार ने कहा कि पिछले साल मेरे वार्ड की तीन गलियों के निर्माण के लिए मैं धरने पर बैठा था। अधिकारियों ने आश्वासन देकर मुझे उठा दिया लेकिन आज तक एक ईंट भी नहीं लगी। पिछले 4 वर्षों से मेरे वार्ड में गलियां, सीवरेज, सफाई जैसी मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। मैंने तीन बार धरना दिया। कई बार शिकायत दी लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अब जब वार्ड के लोग मुझसे पूछते हैं कि काम कब होंगे तो मेरे पास कोई जवाब नहीं होता।
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अंधेरे में शहर.. नगर परिषद के पास नहीं स्ट्रीट लाइटें
शहर में विकास की स्थिति यह है कि नगर परिषद के पास फिलहाल नई स्ट्रीट लाइटें तक नहीं हैं। शहर की करीब 300 लाइटें खराब पड़ी हैं जिन्हें संबंधित कंपनी ने बदलने से इनकार कर दिया है। नई खरीद के टेंडर अटके हैं और परिषद के पास लाइटें ठीक करने के लिए खुद की हाइड्रोलिक सीढ़ी तक उपलब्ध नहीं है।
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पार्षद के इस्तीफा देने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। उन्हें एक बार बात करनी चाहिए थी। शहर में विकास कार्य के लिए टेंडर लग रहे हैं। उनकी एक गली का एस्टीमेट ज्यादा है। मुख्यालय में प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा हुआ है। बाकि वार्डों में काम हो रहे हैं। - सविता टुटेजा, उपप्रधान, नगर परिषद।
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फिलहाल शहर में विकास कार्यों के लिए टेंडर लग रहे हैं। ये बात सही है कि उनके वार्ड में काम की जरूरत है। सभी वार्डों को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारी न होने से दिक्कत जरूर आई है। - राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान, नगर परिषद।
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भूना रोड पर खराब स्ट्रीट लाइटों से बढ़ी परेशानी
शहर के व्यस्त भूना रोड पर बार-बार खराब हो रही स्ट्रीट लाइटों से दुकानदारों, राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई दिनों से लाइटें बंद होने के कारण रात के समय सड़क पर अंधेरा पसरा रहता है। दुकानदारों का कहना है कि भूना रोड पर बड़ी संख्या में वाहन मिस्त्रियों की दुकानें हैं जहां शाम तक काम चलता है। अंधेरा होने से काम प्रभावित होता है और लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है। साथ ही चोरी जैसी घटनाओं का भी डर बना रहता है। नगर परिषद के जेई नरेंद्र कुमार ने बताया कि संबंधित कंपनी के कर्मचारी जांच करेंगे जिसके बाद लाइटों की मरम्मत या बदलने की कार्रवाई की जाएगी।
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