फतेहाबाद। नगर परिषद ने शहर में सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए रेवाड़ी की एजेंसी को ठेका दिया है। एजेंसी ने पशुओं को पकडऩे का काम भी शुरू कर दिया है लेकिन नगर परिषद को इन्हें छोड़ने के लिए जगह नहीं मिल रही है। शहर और आसपास के गांवों की नंदी और गोशाला लेने से मना कर रहे हैं। ऐसे में एजेंसी के सामने पशुओं को छोड़ने के लिए संकट खड़ा हो गया है।
शहर में जगह न मिलने के बाद अब नगर परिषद गांवों की गोशाला और नंदीशाला से संपर्क कर रही है। ये हालात तब है जब करीब दो माह पहले जिला नगर आयुक्त कार्यालय की तरफ से 33 नंदीशाला और गोशालाओं की सूची जारी करके इन्हें छोड़ने के निर्देश दिए थे। जो सूची दी गई है उसमें करीब 4 हजार पशु छोड़े जा सकते हैं। वहीं मताना स्थित नंदीशाला के मैनेजर प्रेम कुमार का कहना है कि उनके पास पहले से करीब डेढ़ हजार पशु हैं। वह नगर परिषद द्वारा पकड़े गए नंदी को रख सकते हैं लेकिन अन्य पशु नहीं रख सकते हैं। नगर परिषद सिर्फ डेढ़ लाख का ही भुगतान कर रहा है। वहीं हरियाणा गोशाला के मैनेजर प्यारे लाल का कहना है कि उनके पास जगह नहीं है और करीब 2200 पशु हैं। वैसे भी उनके पास सरकार की तरफ से कोई पत्र नहीं आया है।
920 रुपये प्रति पशु किया जा रहा भुगतान :
नगर परिषद द्वारा पशुओं को पकड़ने और उनके टैगिंग को लेकर टेंडर की प्रक्रिया पिछले साल अगस्त माह में शुरू की थी। ये प्रक्रिया अब सिरे चढ़ी है। नगर परिषद ने रेवाड़ी की एजेंसी को 920 रुपये प्रति पशु का ठेका दिया है। एजेंसी को पशु पकड़कर इनकी टैगिंग करनी है और गोशाला और नंदीशाला में छोड़ना है।
पशुओं के कारण हो चुके हैं हादसे
शहर में सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं के कारण कई बार हादसे भी हो चुके हैं। पिछले दिनों जगजीवन पुरा मोहल्ला में पशुओं ने बच्चे को उठाकर पटका था। जिससे वह चोटिल हो गया था। इसके बाद पार्षदों ने बेसहारा पशुओं को पकड़ने का मुद्दा उठाया था।
नंदीशाला और गोशालाओं से संपर्क किया गया है, कुछ आनाकानी कर रहे हैं। इसके चलते गांव की गोशाला से संपर्क किया है, उन्होंने सहमति दे दी है।
- राजेंद्र सोनी, ईओ नगर परिषद