जिले में धान की पराली जलाने के मामले मेें बुधवार को चार किसानों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों ने संबंधित थाने में शिकायत देकर आरोप लगाया कि उक्त किसानों ने वायु प्रदूषण एक्ट का उल्लंघन किया है। पुलिस ने धारा 188 व 278 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अभी तक किसी भी किसान की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। जिले में पिछले कई दिनों से धान की कटाई चल रही है। कृषि विभाग को हरसेक से पता चला है कि जिले में 48 जगह पर आगजनी हुई है। विभाग ने ग्राम लेवल कमेटी को वहां भेजकर लोकेशन ट्रेस करवाई, जिसमें गांव का पटवारी, ग्राम सचिव व विभाग के एडीओ शामिल थे। इस टीम ने वेरिफिकेशन में पाया कि 19 किसानों की लोकेशन झूठी है। इन किसानों के खेतों में आगजनी की घटना नहीं हुई। जबकि 10 किसान आगजनी की घटना के दोषी पाए गए। इन किसानों के खिलाफ कृषि विभाग के एडीओ ने संबंधित थाना में एफआईआर के लिए शिकायत दे दी है। जबकि अन्य के खिलाफ अभी ग्राम लेवल कमेटी जांच कर रही है।
शिकायत के आधार पर बुधवार को रतिया के कृषि अधिकारी रजनी व सुखविंद्र की शिकायत पर चंदोकलां के किसान हरपाल सिंह के खिलाफ पराली जलाने का मामला दर्ज किया गया है। हरपाल सिंह द्वारा 16 कनाल 14 मरले में पराली जलाई गई थी, जिसकी सूचना मिलने पर कृषि अधिकारी द्वारा शिकायत की गई थी। दूसरी तरफ रतिया पुलिस ने एडीओ सुखविंदर की शिकायत पर बादलगढ़ निवासी किसान गुरचरण सिंह के खिलाफ पराली जलाने के आरोप में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
उधर, टोहाना में कृषि विभाग के एसडीओ मुकेश मेहला की शिकायत पर गांव पिरथला के रहने वाले सुभाष व जमालपुर के रहने वाले इंदु ने अपने खेत में धान की पराली को आग लगाकर वायु प्रदूषण किया है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पुलिस ने धारा 188 व 278 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि हरसेक ने उन्हेें 48 लोकेशन प्राप्त हुई थी। जहां पर आग की घटनाएं बताई गई थी। ट्रेस करने पर पता चला कि 19 खेतों में लोकेशन गलत आई है। 10 किसान दोषी पाए गए जिनके खिलाफ थाने में शिकायत दी गई। जबकि अन्य की जांच चल रही है। बता दें कि बीते वर्ष आज के दिन तक छह लोकेशन प्राप्त हुई थी जो इस बार बढ़कर 48 हो गई है।
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के इंकार के बाद कृषि विभाग करवा रहा है किसानों पर एफआईआर
पिछले दिनों सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने हरियाणा स्टेट प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को पत्र लिखकर धान के अवशेष जलाने वाले किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाने का जिम्मा डाला था। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने सरकार को पत्र लिखकर यह काम करने से इंकार कर दिया। विभाग के एक्सपर्ट ने बताया कि यह काम पहले भी कृषि व राजस्व विभाग करता आ रहा है। अब भी उन्हें ही यह काम दिया जाए। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के इंकार के बाद अब कृषि विभाग ने किसानों के खिलाफ केस दर्ज करवाना शुरू कर दिया है।