फतेहाबाद। शहर के आधे हिस्से में सफाई व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद को झटका लगा है। जिला नगर आयुक्त कार्यालय ने डोर टू डोर कचरा उठान के पुराने ठेके को दो फीसदी बढ़ोतरी के साथ जारी रखने के नगर परिषद प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। इसके बाद नगर परिषद ने छह माह के लिए नई एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अधिकारियों ने पुराने ठेके को बढ़ाने के प्रस्ताव को तीन बार पहले विस्तार दिए जाने का हवाला देते हुए खारिज किया है। अब नई एजेंसी के चयन के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। इस प्रक्रिया में करीब 20 दिन से एक माह तक का समय लग सकता है। नगर परिषद प्रशासन का कहना है कि छह माह के अस्थायी ठेके के दौरान पांच साल की स्थायी व्यवस्था वाले ठेके की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
दूसरी तरफ पांच साल के ठेके का प्रस्ताव नगर परिषद ने निदेशालय को भेजा हुआ है। प्रस्ताव के अनुसार नई एजेंसी को करीब 130 कर्मचारियों की तैनाती करनी होगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 27.5 करोड़ रुपये है। फिलहाल शहर के कई वार्डों में सफाई व्यवस्था प्रभावित है। वार्ड 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 23 और 24 में कचरा उठान का काम बंद है।
भट्टू रोड क्षेत्र में पहले निजी एजेंसी सफाई कार्य संभाल रही थी जबकि शहर के अन्य हिस्सों में नगर परिषद अपने स्तर पर सफाई व्यवस्था चला रहा था। नई एजेंसी के चयन में देरी होने से प्रभावित वार्डों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद के सामने जल्द व्यवस्था बहाल करना चुनौती बना हुआ है। संवाद
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वार्ड समिति की बैठक में पार्षद बोले- आते हैं चाय पीकर चले जाते हैं
नगर परिषद ने मंगलवार को वार्ड समिति की बैठक बुलाई। सुबह वार्ड 1 से 7 और शाम को वार्ड 8 से 15 तक के वार्ड समिति के सदस्य बुलाए गए है। सुबह की बैठक में प्रधान और उपप्रधान नहीं पहुंचे। सचिव गोविंद, स्वच्छ भारत मिशन के सिटी इंचार्ज कुमार सौरभ ने वार्ड समिति सदस्यों की समस्याएं सुनी। वार्ड एक के पार्षद राजकुमार ने कहा कि सफाई के लिए कर्मचारी नहीं आ रहे हैं। खाली प्लॉट में कचरे के ढेर लगे हैं। एसआई कहता है जेसीबी का ड्राइवर नहीं है। अधिकारी-कर्मचारी आते हैं चाय पीकर चले जाते हैं। वार्ड 4 की पार्षद किरण नारंग ने कहा कि टेंडर लगाने में भेदभाव हो रहा है। कहीं एक करोड़ के काम हो रहे हैं और उनके वार्ड में 10 लाख के टेंडर नहीं लग रहे हैं। पार्षद रमेश गिल्होत्रा ने कहा कि उनके वार्ड में जगह-जगह गड्ढे हो रखे हैं। वार्ड 2 से आए समिति सदस्यों ने कहा कि कई गलियों का निर्माण बीच में छोड़ हुआ है।
पार्षद पूछते रहे मुद्दा, अफसर नहीं दे पाए जवाब
नगर परिषद कार्यालय में सुबह और शाम को हुई वार्ड समिति की बैठक में पार्षद अधिकारियों से मुद्दा पूछते रहे लेकिन अधिकारी जवाब नहीं दे पाए। पार्षद मोहन लाल नारंग ने कहा कि वार्ड समिति की बैठक किस मुद्दे पर बुलाई गई है बताया जाए। सफाई यहां हो नहीं रही है। बैठक में प्रधान और उपप्रधान को होना चाहिए था लेकिन नहीं है। सचिव गोविंद ने कहा कि वार्ड समिति के सदस्य सत्यापन करेंगे कि उनके वार्ड में कौन किस योजना का लाभ ले रहा है इसको पर वार्ड समिति के सदस्यों ने एतराज जताया है।
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आधे शहर में करीब 27 दिनों से सफाई कार्य बंद है। इसके चलते परेशानी हो रही है। नगर परिषद प्रधान ने अपनी पावर का इस्तेमाल करते हुए नियम अनुसार ठेका एजेंसी का बढ़ाने के निर्देश दिए थे लेकिन अधिकारियों ने उसे नहीं माना है। पार्षद भी इस पर सहमत थे। बावजूद धारा 35 ए काम नहीं आई है। इस धारा के तहत आपात स्थिति में प्रधान जनहित में काम करवा सकते हैं।
- मोहन लाल नारंग, पार्षद
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निदेशालय के आदेश पर 6 माह के लिए टेंडर लगा दिया गया है। इस तरह एक एजेंसी को ठेका नहीं दिया जा सकता है। वार्डों में वैकल्पिक व्यवस्था करके सफाई करवाई जा रही है।
- प्रवीण कुमार, जिला नगर आयुक्त