फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल में फतेहाबाद का स्वास्थ्य विभाग पांच साल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट को शुरू नहीं कर पाया है। पांच साल में सिर्फ स्वास्थ्य विभाग बिल्डिंग के लिए एक एस्टीमेट ही बनवा पाया है जिसे अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। हालात ये हैं कि मरीजों को प्लेटलेट्स व अन्य ब्लड कंपोनेंट के लिए निजी सेंटरों पर जाना पड़ रहा है। डेंगू के मरीज बढ़ने पर प्लेटलेट्स की डिमांड बढ़ जाती है। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेट प्रोजेक्ट के लिए मशीनें वर्ष 2018 में भेजी गई थीं। लेकिन इसके बाद कोरोना महामारी आने के चलते मशीनों को लैब शुरू करने के लिए अग्रोहा मेडिकल भेज दिया गया। महामारी रुकी तो स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय के निदेशक ने वर्ष 2021 में ब्लड सेपरेटर कंपोनेंट प्रोजेक्ट के लिए निरीक्षण किया और जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। लेकिन इसके बाद भी दो साल में सिर्फ बिल्डिंग के लिए एस्टीमेट की प्रक्रिया ही आगे बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग फतेहाबाद ने लोक निर्माण विभाग से बिल्डिंग का एस्टीमेट बनवाकर मुख्यालय को भेज रखा है लेकिन मंजूरी नहीं मिली है। ब्लड सेपरेट कंपोनेंट प्रोजेक्ट के लिए अलग भवन की जरूरत है। संवाद
नए अस्पताल बिल्डिंग के चलते अटका प्रोजेक्ट
अधिकारियों की माने तो स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने नागरिक अस्पताल में नई बिल्डिंग की फिलहाल मंजूरी देने को तैयार नहीं है। इसके पीछे कारण ये है कि नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग का निर्माण हो रहा है।
अभी फिलहाल नहीं आई है प्लेटलेट्स की डिमांड
जिले में डेंगू के अभी तक 6 केस मिल चुके हैं। इसमें सभी की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो प्लेटलेट्स चढ़ाने की अभी किसी मरीज में जरूरत नहीं पड़ी है।
एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को हो सकता है फायदा
ब्लड कंपोनेंट सेपरेट मशीन अगर लगती है तो एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को फायदा हो सकता है। थैलेसीमिया में ऐसे मरीजों को लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) की जरूरत होती है। अब ब्लड से आरबीसी अलग करके थैलेसीमिया के मरीजों को चढ़ाना आसान होगा। डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं। इस मशीन से खून से प्लेटलेट्स अलग किए जा सकते हैं। बर्न केस के मरीजों को बचाने के लिए प्लाजमा की जरूरत होती है। एड्स के मरीजों को श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की जरूरत होती है।
कोट
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन के लिए अलग से बिल्डिंग की जरूरत है। एस्टीमेट मुख्यालय में भेजा गया है। जगह के अभाव के कारण दिक्कत आ रही है।
-डॉ. रासिद, इंचार्ज ब्लड बैंक