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ब्लैक फंगस की जिले में दवा तक नहीं, आशंकित मिलते ही कर रहे रेफर, 12 गवां चुके जान

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ब् कोरोना को मात देने के बाद लोग ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे हैं। आंख, नाक व चेहरे पर सूजन व दर्द से पीड़ित हो रहे हैं। ये ही नहीं जिले के 12 लोग ब्लैक फंगस के कारण जान भी गवां चुके है। बीमारी महामारी का रूप लिए करीब एक माह से ज्यादा का समय हो चुके है लेकिन जिला नागरिक अस्पताल में ब्लैक फंगस की दवा तक नहीं है। मरीज अस्पतालों के चक्कर काट रहे है। जिला नागरिक अस्पताल ब्लैक फंगस मरीजों के लिए रेफर सेंटर बन चुका है।
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ब्लैक फंगस आशंकित मरीजों को अग्रोहा मेडिकल रेफर किया जा रहा है लेकिन यहां भी उन्हें उपचार नहीं मिल रहा है। जानकर हैरानी होगी कि जिले में अब तक 44 आशंकित मरीज मिल चुके हैं। 28 की पुष्टि हो गई है। इसमें 12 जान गवां चुके है। 10 ऐसे मरीज हैं जिन्होंने अग्रोहा मेडिकल में दम तोड़ा है। दो मरीज घर पर ही दम तोड़ गए।
ऑपरेशन किया, दवा न मिलने से चली गई जान
नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने ब्लैक फंगस एक मरीज का ऑपरेशन किया था। लेकिन ऑपरेशन के अगले दिन मरीज की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मरीज को एंटी ब्लैक फंगस दवा की जरूरत थी लेकिन यहां डॉक्टरों को एक ही डोज उपलब्ध हुई थी। यहां से अग्रोहा रेफर किया लेकिन हालत बिगड़ती गई और उसकी जान चली गई।
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जानिए क्या है जिले में ब्लैक फंगस की स्थिति
आशंकित मरीज मिले - 44
ब्लैक फंगस की पुष्टि - 28
मौत हुई - 12
स्वस्थ हुए - 18
अग्रोहा मेडिकल में दाखिल- 13
चार दिन तक यहां रहे, उपचार नहीं मिला : मेरी मामी को कोरोना होने पर फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। कोरोना ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस हो गया। चार दिन तक यहां रहे लेकिन उपचार नहीं मिला। फिर रोहतक पीजीआई भेजा गया। यहां पर ऑपरेशन हुआ। कभी दवा अंदर से मिल जाती है नहीं तो बाहर से खरीदनी पड़ रही है। - कर्ण कुमार, मरीज का रिश्तेदार
ब्लैक फंगस मरीजों को अग्रोहा मेडिकल रेफर किया जाता है। यहां पर मरीजों के लिए सभी सुविधाएं है। अगर किसी को लक्षण दिखते हैं तो वह नागरिक अस्पताल फतेहाबाद में जांच करवा सकता है। यहां पर ब्लैक फंगस की दवा नहीं है, हम मरीज को अग्रोहा मेडिकल भेज रहे हैं। कई मरीज सीधा भी पहुंच रहे है। - डॉ. विष्णु मित्तल, जिला महामारी अधिकारी।
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