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सात साल पहले सिक्का खोटा अब कोर्ट ने बताया खरा

Sun, 16 Apr 2017 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
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‌िससिकका पऊफाोटाो - फोटो : fatehabad
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कागजों में रिटायर हुए पांच साल हो चुके हैं। लेकिन कुर्सी 12 साल पहले छीन ली गई थी। रिश्वत के उन आरोपों के चलते, जिन्हें हाईकोर्ट ने नकारते हुए उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। लेकिन इज्जत की इस जंग को जीतने में उन्हें सात बरस का लंबा समय लग गया।
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इस बीच कार्यकाल के पांच साल भी बेकार निकल गए। शनिवार को मीडिया से बातचीत में अपने उच्चाधिकारियों द्वारा दिए गए प्रशंसा पत्र की कॉपी दिखाते हुए काडा के पूर्व कार्यकारी अभियंता आरके सिक्का रो पड़े। बताया कि मेरे अफसर कहते थे कि मैं सबसे ज्यादा मेहनती एक्सईएन हूं पूरी रेंज में। लेकिन मैं अपनी काबलियत दिखा नहीं सका, क्योंकि मेरे ही विभाग के कुछ लोगों ने मेरे साथ धोखाधड़ी करते हुए मुझे रिश्वत के झूठे मामले में फंसा दिया। लेकिन सात साल तक कानूनी लड़ाई में वो कुछ साबित नहीं कर सके।
हाईकोर्ट ने 2012 में उनके ऊपर लगे आरोपों को नकारते हुए रिश्वत के आरोप से बाइज्जत बरी कर दिया। लेकिन इन आदेशों के बावजूद उनके खुद के विभाग ने अभी तक उनको मिलने वाली कोई सुविधा बहाल तक नहीं की है। पिछले पांच सालों से अब पूर्व एक्सईएन सिक्का अपने हक के लिए विभाग से कागजी जंग में जुटे हुए हैं और जीत के काफी करीब हैं।
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प्रदेश मुख्यालय से एक पत्र की कॉपी दिखाते हुए आरके सिक्का ने कहा कि आखिरकार पांच साल के बाद मेरे मुख्यालय ने उन्हें निर्दोष मान लिया है और उन्हें उनके एसई पद पर लंबित प्रमोशन, रिटायरमेंट सुविधाएं ससम्मान लौटाने की हामी भर दी है। अब चंडीगढ़ मुख्यालय से हिसार एसई कार्यालय में पत्र आते ही उनकी सुविधाएं शुरू कर दी जाएंगी। पिछले 12 साल का वेतन और एरियर मिलने में तो अभी एक से दो साल का समय लग सकता है लेकिन सिक्का को खुशी इस बात की है कि उनके माथे पर लगा बदनामी का दाग आखिरकार धुल गया। लेकिन इस मामले के चलते उन्हें और उनके परिवार को काफी समय तक संघर्ष करना पड़ा। सिक्का बताते हैं कि इसके चलते उनकी बेटी की पढ़ाई तक एक साल के लिए छोड़नी पड़ी थी।

शहर में रहते हुए 9 सालों से बाजार तक नहीं गए
आरके सिक्का ने बताया कि वो रिश्वत मामले में आरोप दर्ज होने के बाद से शहर में होने के बावजूद बाजार में नहीं गए। क्योंकि उन्हें लोगों के सवालों का जवाब देने की हिम्मत ही नहीं थी। सिक्का ने कहा कि पत्रकारों को कोर्ट एवं मुख्यालय के आदेशों की कॉपी देने के लिए वो बीती रात धर्मशाला रोड पर आदेशों की फोटोस्टेट करवाने गए तो उनके बेटे को बताया कि वो 9 सालों के बाद इस धर्मशाला रोड बाजार में आए हैं।

ये था मामला
काडा के कार्यकारी अभियंता रहते हुए 9 अगस्त 2005 को विजिलेंस ने आरके सिक्का को उनके घर पर दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए काबू किया था। उनके विभाग के ही ठेकेदार विजेंद्र साहू ने उन पर आरोप लगाया था कि चार बिलों को फाइनल करने एवं पांचवें काम के लिए सामान देने के एवज में सिक्का ने उनसे दस हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। बाद में इस मामले में लगभग दो माह तक सिक्का को न्यायिक हिरासत में भी रहना पड़ा था, जिसके बाद उनकी जमानत हुई थी। सिक्का का आरोप है कि उस रात विजिलेंस की टीम ने जबरदस्ती उन्हें पाउडर लगे नोट थमाने की कोशिश की थी और बाद में उन पर केस बना दिया गया।

इस तरह खुद को कर पाए निर्दोष
सिक्का के अनुसार जिस कार्य की फाइनल रिपोर्ट देने के लिए उन पर रिश्वत देने का आरोप लगाया गया था, उस कार्य की फाइनल रिपोर्ट दूसरे एक्सईएन ने डेढ़ साल बाद जारी की। नए कार्य के लिए सामान मांगने के लिए लगाए गए आरोपों के बारे में सिक्का ने बताया कि 9 अगस्त 2005 को उन पर यह आरोप लगाया गया कि सीमेंट नहीं दी जा रही, जबकि उस ठेकेदार का वर्क ऑर्डर भी 6 अक्तूबर 2005 को जारी किया गया। वर्क ऑर्डर जारी होने से पहले ठेकेदार को सामान नहीं दिया सकता। कोर्ट ने जब तथ्यों की जांच की तो उनपर लगे आरोप झूठे पाए गए, जिसके चलते सेशन कोर्ट ने 16 मई 2009 को उन्हें इस मामले में बरी कर दिया मगर सरकार 16 महीने बाद हाईकोर्ट पहुंच गई।  सिक्का ने बताया कि सरकार को 3 माह में हाईकोर्ट में अपील करनी थी मगर 16 महीने बाद सरकार की अपील हाईकोर्ट में अपील स्वीकार कर ली। लेकिन हाईकोर्ट ने भी 2 अप्रैल 2012 को उनके हक में फैसला सुनाते हुए उन्हें रिश्वत लेने के आरोपों से बरी कर दिया। इसके बाद अब विभाग ने भी उनको सारी सुविधाएं देने को हामी भर दी है।
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