फतेहाबाद। सेम की वजह से बंजर हो रही जिले की 40,000 एकड़ जमीन में से 28,000 को बचाने के लिए तो कवायद शुरू हो गई है। मगर 12,000 एकड़ भूमि की सुध नहीं ली गई है। भट्टू खंड के गांव ढाबी कलां, ठूइयां, गदली, बनमंदोरी, ढाबी खुर्द, रामसरा और भट्टू कलां ऐसे गांव हैं, जहां 50 प्रतिशत से अधिक जमीन सेमग्रस्त हो चुकी हैं। इन गांवों में तो सेम से छुटकारे के लिए ट्यूबवेल लगवा दिए गए हैं, लेकिन गांव किरढ़ान, ढांड, बनावाली, मेहूवाला में सेम के समाधान की शुरुआत नहीं की गई है। इस कारण इन गांवों के किसान खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने फरवरी महीने में 26 करोड़ रुपये का बजट पास किया था। इस बजट से 28,770 एकड़ सेमग्रस्त भूमि में 285 सौर ऊर्जा से चलित ट्यूबवेल लगाकर पाइप लाइन बिछाई जा रही है। इससे सेम के पानी को सेम नाले में डाला जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रशासन द्वारा जुलाई माह तक का समय मांगा है। प्रशासन के अनुसार सेमग्रस्त भूमि में कम गहराई में लगे ये ट्यूबवेल जल स्तर को गिराने काम करेंगे। गांव भट्टू कलां की सेमग्रस्त जमीन के लिए 23 सौर ऊर्जा के ट्यूबवेल लगाने का काम पूरा किया है। एक साल तक इन ट्यूबवेलों की रखवाली की जिम्मेदारी ठेकेदारों को दी गई है। एक साल के बाद इसकी रखवाली किसानों को सौंपी जाएगी। संवाद
नियमित निगरानी नहीं होने से काम की गति धीमी, बारिश का डर
जिन गांवों में ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं, उन गांवों में काम की गति धीमी चल रही है। एक ट्यूबवेल लगाने में भी कई दिन लग रहे हैं। काम ठेकेदारों के भरोसे है और जिम्मेदार अधिकारी नियमित निगरानी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में किसानों को फिर से बारिश का डर है। गांव पीलीमंदोरी के सरपंच धर्मवीर गोरछिया कहते हैं कि अगर बारिश आने से पहले इस काम को पूरा नहीं किया गया तो समस्या फिर से बढ़ जाएगी। बारिश आने पर एक बार फिर ट्यूबवेल लगवाने के काम में ठहराव आ जाएगा। सेमग्रस्त इलाकों में फिर से जलभराव हो जाएगा और किसानों के लिए मुसीबत पैदा होगी। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि यह कार्य दो ठेकेदारों को सौंपा हुआ है। एक ठेकेदार जुलाई में काम पूरा करेगा जबकि दूसरे को सितंबर तक डेडलाइन दी गई है।
गांव भट्टू कलां में ट्यूबवेल गलत जगह लगाने के भी आरोप
गांव भट्टू कलां के किसान राय सिंह, भरत सिंह, रामनिवास और विनोद कुमार आदि ने बताया कि उनके गांव में सरकार ने किसानों की मांग पर सेम की समस्या के निर्वारण के लिए 4 करोड़ के बजट से अच्छा प्रोजेक्ट तैयार किया है। मगर जमीनी हकीकत यह है कि इस प्रोजेक्ट का गलत प्रयोग हो रहा है। गांव भट्टू कलां में लगाए गए ट्यूबवेल सत्ताधारी पार्टी में बैठे नेताओं के चहेतों के खेतों में लगा दिए गए हैं। ये ट्यूबवेल ऐसे रकबे में लगाए गए हैं, जहां सेम की समस्या ही नहीं है। वहीं, गांव का जो रकबा सेमग्रस्त है, उस जमीन में ट्यूबवेल नहीं लगाए गए हैं। इसके बारे में किसानों ने अधिकारियों से बात भी की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।
इन गांवों में शुरू हो चुका कार्य व मंजूर राशि
गांव राशि
शेखुपुर दड़ौली - 2.70 करोड़
गदली - 2.6 करोड़
बनमंदोरी - 2.79 करोड़
ढाबी खुर्द - 3.26 करोड़
रामसरा - 1.50 करोड़
भट्टू कलां - 4.8 करोड़
ढाबी कलां - 4.23 करोड़
ठुईयां - 3. 72 करोड़
पीलीमंदोरी - 3.81 करोड़
इन गांवों की राशि हो चुकी मंजूर
गांव राशि
खाबड़ा कलां - 3.10 करोड़
बड़ोपल - 3.29 करोड़
जांडवाला बागड़ - 1.85 करोड़
दहमन - 2.17 करोड़
कोट
जिले में सेमग्रस्त जमीन के 28770 एकड़ रकबे के लिए काम शुरू कर दिया गया है। जुलाई माह तक काम पूरा होगा। इस प्रोजेक्ट की एक वर्ष की सुरक्षा ठेकेदाराें द्वारा की जाएगी और उसके बाद की सुरक्षा किसानों को खुद करनी होगी। जो गांव बचे हुए हैं, उनमें टीमें जाकर जलस्तर व लवणता की जांच करेगी। उसके बाद समाधान का प्रोजेक्ट बनेगा।
-बिजेंद्र सिंह, कृषि मृदा एवं लवणता सरंक्षण अधिकारी, फतेहाबाद