अपनी पदक विजेता साइकिलिंग खिलाड़ी बेटी राजबाला के साथ रामचंद्र।
फतेहाबाद। अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए एक पिता किस कदर मेहनत करता है, इसकी बानगी गांव ढाणी सांचला में साइकिलिंग खिलाड़ी राजबाला के घर देखने को मिलता है। राजबाला के पिता रामचंद्र ने ब्याज पर उधार पैसे लेकर अपनी बेटी को नेशनल गेम्स तक पहुंचाया है। खुद का पेट काटकर परिवार की जरूरतों को पूरा करना और बेटी के सपनों को पंख लगाना रामचंद्र के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। मगर पिता के फर्ज को पूरा करते हुए 61 वर्षीय रामचंद्र दूसरे बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बने हैं।
दरअसल, रामचंद्र के पांच बच्चे हैं, इनमें तीन बेटियां और दो बेटे हैं। सबसे बड़ी बेटी सुमन की शादी हो चुकी है। दूसरे नंबर की बेटी राजबाला ने स्कूली शिक्षा पास करते हुए साइकिलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना संजोया। उसने अपने पिता को बताया। रामचंद्र ने बेटी का समर्थन करते हुए उसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया। बेटी ने भी पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने में कसर नहीं छोड़ी है। राजबाला जिला, जोनल फिर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। नेशनल प्रतियोगिताओं में तीन सिल्वर मेडल जीते हैं। साल 2022 में गुजरात में हुए नेशनल गेम्स में भी राजबाला ने सिल्वर मेडल जीता।
छोटी बेटी पूजा भी साइकिलिंग कर रही
राजबाला बताती हैं कि उनके पिता ठेके पर खेती करते रहे। जब भी उसे खेलने जाने के लिए, साइकिल या अन्य कोई जरूरत होती तो पिता हर मांग पूरी करते। हमें खेल में आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने कभी ब्याज पर पैसे लिए तो कभी उधार। मगर हमारा अभ्यास नहीं रुकने दिया। अब तो घुटनों में दर्द रहने के कारण पिता खेती नहीं कर पाते हैं। राजबाला बताती हैं कि उनके परिवार में मां बिमला देवी गृहिणी हैं। बड़ी बहन सुमन के अलावा छोटी बहन पूजा, फिर छोटे भाई सुरेंद्र व रविकांत हैं। पूजा भी साइकिलिंग खिलाड़ी हैं। उसने भी उसे देखकर साइकिलिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ना शुरू किया है। सुरेंद्र बीए की परीक्षा दे चुका है जबकि रविकांत 12वीं की पढ़ाई कर रहा हैं।
बच्चों के सपनों से बढ़कर कुछ नहीं
रामचंद्र कहते हैं कि माता-पिता के लिए बच्चों से बड़ी कोई संपत्ति नहीं है। बच्चों के सपनों से बढ़कर कुछ नहीं है। हर पिता को अपने बच्चों के सपनों का सम्मान करना चाहिए। बेटा और बेटी को बराबर सम्मान मिलना चाहिए। बेटियां खेल में आगे बढ़ेंगी तो निश्चित रूप से गांव, जिले, प्रदेश व देश का नाम रोशन होगा। रामचंद्र ने बताया कि राजबाला की तरह पूजा भी साइकिलिंग में करियर बनाने के लिए प्रयासरत हैं। दोनों बेटियों को खेलने के दौरान कोई कमी नहीं रहने देंगे।