फतेहाबाद। आयुष्मान भारत की चिरायु योजना के तहत जिले में 65 फीसदी पात्रों के आयुष्मान कार्ड बने हैं। 35 फीसदी पात्र ऐसे हैं जो कि कार्ड बनवाने के लिए नहीं आ रहे हैं। जिले में पिछले साल आयुष्मान भारत योजना के तहत 10 हजार पात्रों ने निशुल्क उपचार करवाया है। इन पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को लाभ देने के लिए जिले में 15 अस्पतालों को पैनल में लिया गया है। जिसमें 9 निजी अस्पताल टोहाना और 5 फतेहाबाद के शामिल हैं। इसके अलावा रतिया, भट्टूकलां, भूना का कोई अस्पताल पैनल में शामिल नहीं है। आयुष्मान भारत की चिरायु योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग को 393306 पात्रों की सूची मिली है। इस सूची के मुताबिक जिले में 259004 पात्रों के आयुष्मान कार्ड बन चुके है। करीब 1 लाख 34 हजार पात्र कार्ड बनवाने के लिए नहीं पहुंचे हैं।
ये हैं पैनल में शामिल अस्पताल
वधवा सर्जिकल अस्पताल, फतेहाबाद
पारूल ईएनटी स्किन एवं लेजर सेंटर, टोहाना
राजन आई, हार्ट एवं लेजर सेंटर, टोहाना
आई क्यू विजन प्राइवेट लिमिटेड, फतेहाबाद
जयपुर चिल्ड्रन अस्पताल, फतेहाबाद
राजस्थान मेडिकल सेंटर, टोहाना
सद्भावना अस्पताल, फतेहाबाद
जनता आई एवं मैटरनिटी अस्पताल, टोहाना
अरोड़ा अस्पताल, टोहाना
मेहता आई अस्पताल, टोहाना
लाइफ केयर अस्पताल, फतेहाबाद
जैन चेरिटेबल अस्पताल, टोहाना
सांई अस्पताल, टोहाना
कक्कड़ नर्सिंग होम, टोहाना
जिले के 10 हजार से ज्यादा मरीजों को मिला फायदा
आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले में पिछले साल 10320 पात्रों का मुफ्त उपचार करवाया गया है। इसमें 971 पात्रों का उपचार सरकारी अस्पताल तो 9403 पात्रों का उपचार निजी अस्पताल में हुआ है।
हार्ट की बीमारी का मेरा फ्री उपचार हुआ
निजी अस्पताल में हार्ट की बीमारी का मेरा फ्री उपचार हुआ है। आयुष्मान कार्ड के तहत ये उपचार हुआ है। इस उपचार पर करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च आना था लेकिन कार्ड के चलते फ्री उपचार हुआ है।
-शेर सिंह, निवासी फतेहाबाद।
आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्ड बना हुआ है। उसके पैर में फ्रैक्चर होने पर डॉक्टर ने ऑपरेशन बताया गया। निजी अस्पताल में उसका फ्री उपचार हुआ है।
- राम सिंह, निवासी फतेहाबाद।
कोट
आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले में 65 फीसदी पात्रों के कार्ड बन चुके हैं। जिले में 14 निजी अस्पतालों को पैनल में लिया गया है। जिन पात्रों के कार्ड बने हैं उन्हें योजना का लाभ भी मिल रहा है।
-डॉ. कुलदीप गौरी, उप सिविल सर्जन