फतेहाबाद। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से अगर किसी विद्यार्थी ने कक्षा दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई करनी है तो जानकर हैरानी होगी कि जिला मुख्यालय पर कोई सरकारी स्कूल नहीं है। जिला मुख्यालय एकमात्र राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय था जो कि मॉडल संस्कृति स्कूल बन चुका है और उसे सीबीएसई से मान्यता मिली हुई है। तीन साल से विद्यार्थी हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से पढ़ाई करने के लिए 5 से 10 किलोमीटर दूर गांव के सरकारी स्कूल में दाखिला लेने को मजबूर हैं।
विद्यार्थी गांव भोड़िया खेड़ा, धांगड़, मताना या फिर दरियापुर के सरकारी स्कूल में दाखिला लेने को मजबूर हैं। ऐसे में ड्रॉप आउट विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की भी आशंका ज्यादा है। शिक्षा विभाग को पिछले साल सर्वे के दौरान 5415 विद्यार्थी ड्रॉप आउट मिले थे। जिसमें फतेहाबाद खंड के सबसे ज्यादा 1726 विद्यार्थी शामिल थे। जिला मुख्यालय में लड़कों के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय था जिसे सीबीएसई बोर्ड से जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा जिला मुख्यालय में कन्या के लिए सीनियर सेकेंडरी और भीमां बस्ती में हाई स्कूल है। इसके अलावा जिला मुख्यालय में लड़कों के लिए अतिरिक्त स्कूल नहीं है।
वहीं जिला मुख्यालय में लड़कों के लिए सरकारी महाविद्यालय भी नहीं है। बारहवीं कक्षा की पढ़ाई के बाद छात्रों को जिले से बाहर जाना पड़ रहा है या फिर निजी कॉलेज में दाखिला लेने को मजबूर है। कॉलेज को लेकर कई बार मांग भी उठ चुकी है।
अगले सत्र में कन्याओं के लिए भी आ सकती है समस्या
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का चयन पीएमश्री स्कूल में कर लिया गया है। अगले सत्र में इसे भी सीबीएसई से जोड़ा जा सकता है। ऐसे में अगर लड़कियों को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से कक्षा दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई करनी है तो जिला मुख्यालय से बाहर के स्कूल में दाखिला लेना पड़ेगा।
खंड स्तर पर खोले गए मॉडल संस्कृति स्कूल
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय फतेहाबाद।
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भूना।
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भट्टूकलां।
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रतिया।
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखल।
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इंदाछुई।
86 प्राइमरी स्कूल अंग्रेजी माध्यम
शिक्षा विभाग ने जिले में 86 प्राइमरी स्कूलों को भी मॉडल संस्कृति स्कूल का दर्जा दे रखा है। इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है। इसमें अधिकतर स्कूल गांवों में हैं। लेकिन हकीकत ये है कि प्राइमरी मॉडल संस्कृति स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने के बाद गांवों में आगे की पढ़ाई के लिए मॉडल संस्कृति स्कूल नहीं है। विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम के बाद हिंदी माध्यम से पढ़ाई करनी पड़ रही है।
कोट
मॉडल संस्कृति स्कूल सीबीएसई से जुड़े हैं। ये बात सही है कि जिला मुख्यालय में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से जुड़ा सीनियर सेकेंडरी स्कूल नहीं है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा जाएगा कि किस तरह से समस्या का समाधान हो सकता है। हालांकि विद्यार्थी सीबीएसई से जुडे मॉडल संस्कृति स्कूलों में दाखिला ले सकते हैं।
- दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी