चाचा उदयपाल ने बताया कि अरमान बचपन से ही कबड्डी खेलने लगा था। उसके पिता कुलविंद्र सिंह का सपना था कि बेटा बड़ा खिलाड़ी बनकर गांव और परिवार का नाम रोशन करे। अरमान में ऐसी प्रतिभा भी थी और लगातार अभ्यास करता था।
स्कूल स्तर की कई प्रतियोगिताओं में वह अच्छा प्रदर्शन कर चुका था। पंजाब में तलवंडी, चक्रिया, मानसा, जिले के टोहाना, जाखल सहित अन्य क्षेत्रों में ओपन कबड्डी टूर्नामेंट में कई बार खेल चुका था। अरमान की यही उपलब्धियां आरोपी नाबालिग को बर्दाश्त नहीं होती थी। वह छोटी-छोटी बात पर उससे स्कूल में झगड़ा करने लगता।
आरोपी अपने पिता की क्लीनिक से उठाकर लाया कैंची: अरमान के बड़े
भाई अवि ने बताया कि वह दो भाई हैं। पिता खेती-बाड़ी करते हैं। आरोपी ने शाम को अरमान को गांव के चौक पर मिलने बुलाया। करीब 7:30 बजे अरमान चौक पर पहुंच गया और एक रेहड़ी पर फास्ट फूड खाने लगा। तभी आरोपी वहां पहुंच गया। उसके आरएमपी पिता की चौक पर ही क्लीनिक है।
दोनों रेहड़ी के पास ही खड़े होकर बातचीत करने लगे। इसी बीच उनमें कहासुनी हुई और हाथापाई होने लगी। एकबारगी तो लोगों ने दोनों अलग-अलग कर दिया लेकिन कुछ ही देर बाद आरोपी अपने पिता की क्लीनिक से कैंची लेकर आया और अरमान के सीने पर कई वार कर दिए।
मोबाइल की लत बच्चों को बना रही चिड़चिड़ा
जिला नागरिक अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश ने बताया कि किशोरावस्था में बच्चों का मस्तिष्क पूरी तरह विकसित नहीं होता। इसलिए वे कई बार सही और गलत का परिपक्व आकलन नहीं कर पाते। आजकल मोबाइल पर उपलब्ध हिंसक गेम, उत्तेजक रील और अन्य डिजिटल सामग्री बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर रही है जिससे उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ रही है।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो उसकी समय रहते काउंसिलिंग करानी चाहिए। घर से बाहर जाकर बच्चे क्या करते हैं, उसके दोस्त कैसे हैं, इन पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों के बारे में स्कूल में भी शिक्षकों से फीडबैक लेना चाहिए।
पुलिस की मौजूदगी में किया अंतिम संस्कार
वारदात के बाद से गांव में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सदर थाना प्रभारी शीशपाल पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में ही अरमान का अंतिम संस्कार कराया गया। पुलिस ने गांव के गण्यमान्य लोगों के साथ बैठक कर माहौल शांत करने में योगदान की अपील की।