फतेहाबाद। फतेहाबाद जिले के गांव बुआन भट्टू के बीच स्थित कर्णकोट टीले से गुप्तकाल का मनका (स्फटिक), शतरंज के प्यादे व मूर्तियों के अवशेष मिले हैं। देखने में स्फटिक गुप्तकाल का बताया जा रहा है। पासे व शतरंज के मिट्टी से बने प्यादे भी मिले हैं। इसके अलावा यहां से ग्रेवियर पत्थर भी मिला है, जो महाभारत काल का हो सकता है। यह पत्थर ऊपर व नीचे से लाल रंग का तथा बीच में काले रंग का है।
फतेहाबाद के ऐतिहासिक कर्ण कोट टीले से अक्सर बारिश के दिनों में पुरातत्व महत्व के अवशेष मिलते रहते हैं। एक दिन पहले ही यहां पर स्फटिक का मनका मिला है, जो गुप्तकाल का बताया जा रहा है। गुप्तकाल में स्फटिक के मनकों का काफी चलन था और राजा व महाराजा इसके मनकों को माला के तौर पर प्रयोग करते थे। वहीं, यहां पर शतरंज के मिट्टी से बने प्यादे व पासे भी मिले हैं। यह भी गुप्त काल के बताए जा रहे हैं। संवाद
पानी जैसा है स्फटिक
कर्ण कोट टीले पर पुरातन समय के अवशेषों को सहेजने का कार्य करने वाले शोधकर्ता अजय कुमार ने बताया कि बुधवार को बारिश के बाद एक बार फिर कर्ण कोट टीले से पुरातन महत्व का सामान जमीन से बाहर आने लगा है। वीरवार को जब वह टीले पर गए, तो यहां पर एक पानी जैसा साफ मनका (स्फटिक) भी मिला। इस मनके का प्रयोग गुप्तकाल से चलता आ रहा है। स्फटिक को उस समय राजा व महाराजा माला पहनने व अपने महलों में फर्श निर्माण के लिए प्रयोग करते थे। इसके अलावा यहां पर शतरंज के प्यादे मिले हैं, जो मिट्टी को पकाकर बनाए गए हैं। गुप्तकाल से शतरंज खेेेली आती जा रही है और यहां पर गुप्तकाल के पहले भी कई अवशेष मिल चुके हैं।
मिले टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष व ग्रेवियर
अजय कुमार ने बताया कि इसके अलावा यहां पर मूर्तियों के टूटे हुए अवशेष व महाभारत काल के दौरान प्रयोग किया जाने वाला एक पत्थर भी मिला है। यह पत्थर ऊपर और नीचे लाल रंग का है और बीच में काला है। इसे किस प्रकार बनाया जाता था, यह अनुमान फिलहाल लगाना मुश्किल है, लेकिन इस प्रकार के पत्थरों का प्रयोग महाभारत काल में ही होता था। यह एक अलग प्रकार की तकनीक थी। इस तकनीक के आधार पर नदियों की मिट्टी को लेकर दो छोरों को लाल रंग दिया जाता था और बीच के हिस्से को काला रंग दिया जाता था। यह उस समय की कमाल की तकनीक थी।
नीले रंग की लाख से बनी चूड़ियां भी मिल चुकी हैं यहां से
शोधकर्ता अजय कुमार के मुताबिक इस स्थान पर अलग-अलग स्थानों से नदी की मिट्टी लाकर एक अलग प्रकार की ईंटें व बर्तन भी बनाए गए थे, जो कि गुप्तकाल व कुषाण काल की झलक दिखाते हैं। इसके अलावा यहां पर नीले रंग की लाख से बनी चूड़ियां भी पिछले साल मिली थी, यह सारा सामान पुरातत्व विभाग के हवाले कर दिया गया था।
कोट
मुझे वीरवार को अजय का फोन आया था कि कर्ण कोट टीले से स्फटिक का मनका मिला है। यह काफी कम जगह पर मिलता है और इसे हजारों साल पहले से प्रयोग में लाया जाता था। फिलहाल बारिश का समय है। बारिश का सीजन समाप्त होते ही यह सारा सामान ले लिया जाएगा और कर्ण कोट टीले की करीब आठ एकड़ जमीन की बाड़बंदी भी करवाई जाएगी।
-रवि शर्मा, उपनिदेशक, पुरातत्व विभाग, हरियाणा।
फतेहाबाद के कर्ण कोट टीले से मिला स्फटिक का मनका व अन्य सामान।- फोटो : Fatehabad