फतेहाबाद। लघु सचिवालय परिसर में वीरवार सुबह सायरन बजते ही जिला प्रशासन अलर्ट मोड में नजर आया और तुंरत प्रभाव से बाढ़ की स्थिति से पैदा हुई आपदा में राहत कार्य में जुट गया। आपदा की सूचना पर टीमें मौके पर पहुंची। फंसे लोगों को बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया।
इस मॉक ड्रिल में कई खामियां प्रशासन के सामने आई और इस बारे में समीक्षा की गई। आपदा स्थल पर लोगों की भीड़ जुटी रही। सुरक्षा एजेंसियों ने भीड़ को साइड में करने का प्रयास नहीं किया जो कि सिर्फ तमाशमीन बनी रही। घायलों को लेकर अस्पताल पहुंची एंबुलेंस को ट्रैफिक के कारण पहुंचने में दिक्कत हुई। पुराना बस स्टैंड से अस्पताल रोड पर ट्रैफिक रहा। अस्पताल में पहुंचे घायलों को सहायक नहीं मिले जिन्हें बताया जा सके कि वार्ड और इमरजेंसी सेवाएं कहां है। डीसी डॉ. विवेक भारती ने समीक्षा के दौरान इन मुद्दों को उठाया।
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डीसी और एसपी खुद फील्ड में निकले
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं डीसी डॉ. विवेक भारती प्रशासनिक टीम के साथ स्वयं फील्ड में नजर आए और बचाव व राहत कार्य में जुटी टीम को आवश्यक निर्देश दिए। डीसी के साथ एसपी निकिता ने आपदा के कारण प्रभावित स्थल लघु सचिवालय का एक भाग व नागरिक अस्पताल सहित स्टेंजिंग एरिया नई सब्जी मंडी व राहत कैंप डीपीआरसी हॉल का दौरा करते हुए आपदा प्रबंधन का जायजा लिया। मॉक एक्सरसाइज के नोडल अधिकारी एवं एडीसी अनुराग ढालिया ने कंट्रोल रूम से हर पहलू पर नजर रखी
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28 हुए घायल, 6 की हुई मौत
जिला प्रशासन के बाढ़ जैसी आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल के आयोजन दौरान प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ, पुलिस, फायर विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा अन्य विभागों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया। मॉक ड्रिल के दौरान आपदा की स्थिति में कुल 28 घायलों को रेस्क्यू किया गया जबकि 6 लोगों को मृत घोषित किया गया। गंभीर रूप से घायल 13 लोगों को जिला नागरिक अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया गया जबकि 9 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद राहत केंद्र भेजा गया या छुट्टी दे दी गई। राहत स्थल, स्टेंजिंग एरिया, घटनास्थल 1 व 2 पर एसडीएम टोहाना आकाश शर्मा, एसडीएम रतिया सुरेंद्र सिंह, एसडीएम फतेहाबाद राजेश कुमार व सीईओ जिप सुरेश कुमार अपनी राहत टीम के साथ मौजूद रहे।
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बाढ़ से घुसा पानी
फ्लड मॉक एक्सरसाइज के दौरान भारी बारिश और बाढ़ की काल्पनिक स्थिति बनाकर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। मॉक सिनारियो की स्थिति में लघु सचिवालय में बाढ़ का पानी घुस गया तथा भवन का एक हिस्सा ढह गया जिसके चलते कई लोगों के मलबे में दबने और घायल होने की सूचना मिली। घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर सक्रिय किया और एनडीआरएफ, पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया। पुलिस लाइन में हेलीपेड तैयार किया गया। घायलों को सुरक्षित निकालकर जिला नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया जहां गंभीर घायलों का उपचार किया गया तथा अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद राहत केंद्र भेजा गया।
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मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास करना नहीं बल्कि सभी एजेंसियों की तैयारियों और समन्वय क्षमता का मूल्यांकन करना भी है। इससे भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने में सहायता मिलेगी।
- डॉ. विवेक भारती, डीसी