फोरलेन एवं मेन बाईपास के लिए अधिग्रहीत जमीनों के धरनारत किसानों का गुस्सा आखिर वीरवार को फूट पड़ा। गुस्साए किसानों ने सरकार से उनकी जमीन वापस करने की मांग तक कर डाली। इतना ही नहीं, सरकार के प्रति विरोध जताने के लिए कुछ किसानों ने अधिग्रहीत की जमीन को ट्रैक्टर से जोत भी डाला।
किसानों का साफ कहना था कि सरकार अगर उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है तो वो भी सरकार को जमीन देने को तैयार नहीं होंगे। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि अब उनकी जमीन पर अगर किसी कर्मचारी ने कोई निर्माण कार्य करने की कोशिश की तो उसका परिणाम अच्छा नहीं होगा।
किसान संघर्ष समिति के प्रधान महेश कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर उनके साथ नाइंसाफी कर रही है। उन्होंने कहा कि बाईपास का आकार तिकोना होने के कारण किसानों की जमीन के कई टुकड़े हो गए हैं। इस कारण उनके पास काश्त करने के लिए काफी कम जमीनें बची हैं। ऐसे में अगर किसानों को उनकी जमीन का पर्याप्त मुआवजा ना मिला तो उनके लिए जीवन यापन करना ही कठिन हो जाएगा।
महेश कुमार ने कहा कि फोरलेन के लिए सरकार ने 29 जनवरी को अवॉर्ड घोषित किया था जिसके अनुसार भीवां बस्ती की जमीन का अवॉर्ड 55 लाख रुपये प्रति एकड़, हिजरावां कलां की जमीन का अवॉर्ड 46 लाख रुपये प्रति एकड़ ही घोषित किया गया। किसानों का आरोप है कि इसके साथ 30 प्रतिशत स्लेटियम व ब्याज आदि दिया गया।
आरोप है कि नेशनल हाईवे अथोरिटी ने नया नियम बना दिया। और उसे एक जनवरी से लागू कर दिया। किसानों का कहना है कि जब उनकी जमीन का अवॉर्ड 29 जनवरी को सुनाया गया है तो वो भी नए अधिग्रहण कानून के तहत लाभांवित होने के हकदार हैं।
बाईपास के लिए अधिग्रहीत अधिकतर जमीन लगती है शहर के साथ
बाईपास के लिए अधिग्रहीत की गई अधिकतर जमीन शहर की सीमा के साथ लगती है। इनमें लघु सचिवालय, सब्जी मंडी, सेक्टर-3,4, बतरा पैट्रोल पंप, अम्बेडकर नगर, शास्त्री नगर, अशोक नगर नई अनाजमंडी की जमीन शामिल है। किसानों का आरोप है कि धांगड़, बड़ोपल और दरियापुर जैसे गांव शहर से 10-10 किलोमीटर दूर हैं, लेकिन उनको बावजूद इसके 88 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिया गया है। जबकि उनकी जमीन के शहर के बिल्कुल साथ सटे होने के बावजूद महज 51 लाख और 46 लाख के तहत ही दिया गया।
डेढ़ सौ एकड़ जमीन के मुआवजे पर है विवाद
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने बाईपास एवं फोरलेन के लिए जो जमीन अधिग्रहीत की है, उनमें से भीवां बस्ती रकबे की 23 एकड़, फतेहाबाद की 80 एकड़ और हिजरावांकलां के 46 एकड़ जमीन के मुआवजे पर विवाद हो गया है। इस बारे में अभी तक जिला प्रशासन ने भी किसानों को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। इस कारण किसान पिछले पंद्रह से अधिक दिनों से धरने पर बैठे हैं और किसानों ने यहां पर काम भी रुकवा दिया है।