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Fatehabad News: फसल सत्यापन में पिछड़ा कृषि विभाग अभी 81 हजार एकड़ का मिलान बाकी

Sun, 27 Sep 2026 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद में फसल का डाटा सत्यापन करते हुए पटवारी स्त्रोत : प्रशासन
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फतेहाबाद। मंडियों में फसल की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले किसानों के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। सैटेलाइट से तैयार फसल के डाटा और किसानों की ओर से मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज जानकारी में जिले की 1.11 लाख एकड़ फसल का मिसमैच सामने आया है।
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प्रदेश सरकार ने तीन दिन में इसका सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए लेकिन जिले में अभी तक केवल करीब 27 फीसदी यानी 30 हजार एकड़ फसल का ही सत्यापन हो पाया है। ऐसे में कम समय में शेष 81 हजार एकड़ से अधिक फसल का मिलान करना चुनौती बना हुआ है।
सरकार ने सैटेलाइट के माध्यम से फसल गिरदावरी कराई। सैटेलाइट से मिले डाटा का मिलान किसानों के पोर्टल पर दर्ज विवरण से किया गया तो बड़े स्तर पर मिसमैच सामने आया। अब राजस्व विभाग के कर्मचारियों को मौके पर जाकर वास्तविक फसल का सत्यापन करना पड़ रहा है।
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एक दिन पहले मिले सिर्फ 16 सुपरवाइजर
पटवारियों के अनुसार फतेहाबाद जिले में फसल मिसमैच का आंकड़ा काफी अधिक है जबकि सत्यापन के लिए पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है। कृषि विभाग की ओर से शनिवार को ही 16 सुपरवाइजर उपलब्ध कराए गए हैं। जिले में कुल 121 पटवारी हैं। पटवारियों का कहना है कि इतने कम समय में इतने बड़े क्षेत्र का सत्यापन करना मुश्किल है। फतेहाबाद क्षेत्र में गांवों की संख्या भी अधिक होने के कारण चुनौती और बढ़ गई है।
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मौके पर एप नहीं चल रही, एक दिन में 10-15 जगहों का सत्यापन
फसल सत्यापन के लिए पटवारियों को मिसमैच फसल सत्यापन एप दी गई है। पटवारियों के अनुसार कई जगह मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण एप काम नहीं करती। मौके की फोटो लेकर उसे एप पर अपलोड करना होता है लेकिन नेटवर्क और सर्वर की समस्या के चलते एप कई बार हैंग हो जाती है। इससे एक पटवारी एक दिन में करीब 10 से 15 स्थानों का ही सत्यापन कर पा रहा है।
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इन गांवों में ज्यादा मिसमैच
जिले में चिंदड़, बड़ोपल, हिजरावां कलां, हिजरावां खुर्द, भूथन खुर्द और भूथन कलां समेत कई गांवों में फसल रिकॉर्ड में अधिक मिसमैच सामने आया है। कर्मचारियों को इन क्षेत्रों में मौके पर जाकर वास्तविक फसल का मिलान करना पड़ रहा है।


रिकॉर्ड नहीं सुधरा तो मंडी में बढ़ सकती है परेशानी
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर सत्यापित रिकॉर्ड के आधार पर ही मंडियों में सरकारी खरीद की प्रक्रिया होती है। ऐसे में यदि किसान की बोई गई फसल और पोर्टल के रिकॉर्ड में अंतर बना रहता है तो मंडी में फसल बेचते समय उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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पटवारियों की तरफ से मौके पर जाकर सत्यापन करना पड़ रहा है। कई जगहों पर रेंज की दिक्कत आ रही है। कृषि विभाग की तरफ से शनिवार को ही 16 सुपरवाइजर मिले हैं।
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- कृष्ण कुमार, उपप्रधान, दि रेवन्यू पटवारी एसोसिएशन
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