सफेद मक्खी के बाद जिले में अब नरमे की फसल पर पत्ता मरोड़ बीमारी ने आक्रमण कर दिया है। कृषि विशेषज्ञ भी इस बात को मानते हैं कि पत्ता मरोड़ बीमारी ने नरमे की फसल को खासा नुकसान हो रहा है, लेकिन फिलहाल उनके पास भी इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। कृषि विभाग अब इस बात का सर्वे करेगा कि पत्ता मरोड़ बीमारी ने जिले की कितनी एकड़ जमीन पर नरमे की फसल को प्रभावित किया है।
भट्टू और भूना बेल्ट के गांव सबसे ज्यादा प्रभावित
कृषि विभाग की मानें तो पत्ता मरोड़ बीमारी का सबसे ज्यादा प्रकोप भूना और भट्टू बेल्ट के गांवों पर सबसे ज्यादा है। इन खंडों के गांव मानावाली, दैयड़, किरढान, मेहूवाला, पीलीमंदौरी, भट्टू, बोस्ती, भोडा, इंदाछुई और आसपास के गांवों में भी नरमे की फसल को पत्ता मरोड़ बीमारी लगातार नुकसान पहुंचा रही है। कृषि विभाग भी सबसे पहले इन्हीं इलाकों में सर्वे करने की बात कह रहा है।
पत्ता मरोड़ ऐसे तबाह करती है नरमे की फसल को
नरमे के पौधे पर सफेद मक्खी बैठती है तो वहां पर वह अपना मल छोड़ देती है। मल के प्रभाव में आने से पौधा निढाल हो जाता है और पत्ते पीले पड़ जाते हैं। धीरे-धीरे पत्ता मुड़ जाता है और तना जमीन पर बिछ जाता है। हालांकि अभी नरमे के पौधे पर एक-दो सफेद मक्खी ही देखी गई है, इसलिए मक्खी की बजाए पत्ता मरोड़ बीमारी अधिक प्रकोप दिखा रही है।
सफेद मक्खी की आशंका से पहले ही घटा नरमे का रकमा
जिले में इस बार करीब 70 हजार हेक्टेयर भूमि पर नरमा की बिजाई की गई है। जबकि 2015 में नरमा का रकबा 79 हजार हेक्टेयर था। पिछले साल नरमे पर सफेद मक्खी के प्रकोप का असर इस साल साफ तौर पर नरमे के कुल रकबे पर पड़ा है। पिछले साल के मुकाबले इस साल तकरीबन नौ हजार हेक्टेयर कम भूमि पर नरमे की बिजाई की गई है।
गांव मानावाली के किसान रामचंद्र व सुलतान सिंह ने बताया कि पिछले कई दिनों से नरमे का पौधा पीला पड़कर मुड़कर धरती पर गिर जाता है। उन्होंने बताया कि ये पत्ता मरोड़ बीमारी है।
यह किसानों के लिए अभी गंभीर समस्या नहीं है। गांव में जाकर सर्वे किया जाएगा कि किस-किस किसान की फसल खराब हुई। जहां-जहां किसानों को लगे की फसल में यह बीमारी आई है उस पौधे को काटकर धरती में गाड़ दें।
मुकेश महला, पौधा संरक्षण अधिकारी, फतेहाबाद