फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल के नशामुक्ति केंद्र में बने ओएसटी (मौखिक प्रतिस्थापन थैरेपी) सेंटर में दवाई लेने के तुरंत बाद मरीज नहीं जा सकेंगे। मरीज को कम से कम 15 मिनट तक डॉक्टर व काउंसलर की निगरानी में रहना होगा। ओएसटी (ओरल सब्सटिट्यूशन थैरेपी) से तुरंत बाद बाहर निकलकर टेबलेट का गलत इस्तेमाल की आशंका को लेकर नोडल अधिकारी डॉ. गिरीश ने संबंधित डॉक्टर व स्टाफ को निर्देश जारी किए हैं।
यही नहीं नोडल अधिकारी ने नशामुक्ति केंद्र के आसपास का निरीक्षण भी किया। इस दौरान कई मरीज ओएसटी सेंटर के बाहर ही बैठे मिले। मरीजों को दवाई लेने के बाद अपनी दिनचर्या शुरू करने के निर्देश दिए। हेरोइन का टीके के जरिये नशा लेने वाले युवकों को ओएसटी में लाकर काउंसिलिंग के जरिए डॉक्टर की निगरानी में दवाई दी जाती है। मरीज को रोजाना सेंटर पर आना होता है। बताया जा रहा है कि कई मरीज दवाई लेते ही चले जाते हैं और फिर मुंह से दवाई बाहर निकालकर उसका गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं।
सर्वे में मिल चुके है 702 मरीज
एआई यानि टारगेट इंटरवेंशन के सर्वे में फतेहाबाद क्षेत्र में 702 युवा ऐसे मिले हैं जो कि सीरींज के जरिए नशा ले रहे हैं। हेरोइन नशा ले रहे युवाओं को काउंसिलिंग के जरिए ओएसटी में लाया जा रहा है। यहां जून माह तक 267 मरीज रजिस्टर्ड हो चुके हैं।
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ओएसटी सेंटर में मरीज को रोजाना काउंसिलिंग करके दवा दी जाती है। दवा डॉक्टर की निगरानी में दी जाती है। दवाई का मरीज पर बेहतर असर हो सके, इसको लेकर संबंधित, डॉक्टर को निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ.गिरीश, मनोचिकित्सक एवं नोडल अधिकारी, नशा मुक्ति केंद्र, फतेहाबाद।