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39 साल बाद घरवालों से मिला 18 की उम्र में लापता जसविंद्र

Sat, 05 Dec 2015 11:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
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गांव दशमेश नगर ढाणी के एक युवा किसान जसविन्द्र वर्ष 1976 में मात्र 18 वर्ष की आयु में एक ट्रक चालक के हत्थे चढ़ गया।
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चालक उसे कश्मीर के लोगों के हाथ बेच दिया, जहां उसे 38 वर्ष तक बंधक बनाकर काम कराया गया। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व बाढ़ त्रासदी के दौरान वहां पर पानी भर जाने से सेना ने उसे बाहर निकाला।

इस दौरान वह बंधकों से बिछुड़ गया और एक रेलगाड़ी में बैठकर जालंधर जा पहुंचा। जहां उसे एक कुटिया में संत के साथ डेढ़ वर्ष बिताने के बाद संत के सहयोग से अपने घर वापस लौट आया।
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जसविन्द्र के वापिस आने से पूरा परिवार खुश है। जसविंद्र व उसकी मां से बातचीत करने पर उसकी आंखों से खुशी के आंसू निकल आते हैं।

बहन से मिलने गया भाई फिरोजपुर से हुआ था लापता
57 वर्षीय वृद्ध जसविंद्र सिंह ने बताया कि 1976 में वह टोहाना अपनी खेती के लिए बीज खरीदने गया था। जहां उसका दिल अपनी बहन से मिलने का हुआ।

वह घर पर बिना बताए ट्रेन से अपनी बहन के पास मिलने फिरोजपुर पहुंच गया। अगले दिन जब वह घर आ रहा था तो स्टेशन पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे चाय पिलाई जिससे वह बेहोश हो गया। होश आने पर उसकी घड़ी व डेढ़ सौ रुपये की नकदी गायब थी।

ट्रक ड्राइवर ने अगवा कर कश्मीरियों के हाथों बेचा
जसविंद्र ने बताया कि सब कुछ लुटने के बाद वह मदद की गुहार के लिए फिरोजपुर रेलवे स्टेशन से बाहर गया तो एक ट्रक चालक ने उसे उसके घर तक छोड़ने की बात कह ट्रक में बैठा लिया।

चालक उसे दोबारा चाय में नशा देकर कश्मीर की घाटियों में ले गया और किसी के हाथ उसका सौदा कर फरार हो गया। जब उसे होश आया तो उसने अपने आप को पहाड़ियों में खूंखार आदमियों के बीच पाया।

जहां उसे डरा धमकाकर उससे लगातार 38 साल तक अपने खेतों का काम करवाया।  

संत ने दिए पच्चीस हजार और गाड़ी में बैठाया
संत के पूछे जाने पर उसने अपने जिले का नाम हिसार तो कस्बे का नाम टोहाना बताया। गांव का पुराना नाम गुरुद्वारा भैणी याद आने पर उसे बताया।

जिसके बाद संत रामचंद्र यादव ने उसे लुधियाना से जाखल की गाड़ी पर बैठाकर चला गया। संत ने शिष्यों द्वारा दान के रूप में दी गई लगभग पच्चीस हजार की राशि भी जसविंद्र को दे दी।

जसविंद्र लुधियाना से गाड़ी द्वारा जाखल रेलवे स्टेशन पर उतरा जहां से सुबह 4 बजे ट्रेन द्वारा टोहाना पहुंचा।

भाई ने नहीं पहचाना, चाची ने देखते ही गले लगाया
किसी व्यक्ति ने उसका घर बताया तो वह घर के पास जाकर खड़ा हो गया कि शायद कोई उसे पहचान ले। इस दौरान उसे उसका छोटा भाई हरविंद्र पाल सिंह ने भी देखा लेकिन बिछड़ते समय मात्र छह वर्ष का होने के कारण उसे पहचान नहीं पाया।

इसी दौरान उसकी चाची बाहर निकली जिसे वह थोड़ा-थोड़ा पहचान गया। चाची ने भी गौर से देखने के बाद उसे गुल्लू भतीजा कहकर गले से लगा लिया।

जसविंद्र के परिवार में उसकी 5 बड़ी बहनें व एक छोटा भाई का हंसता खेलता परिवार है। उससे मिलने के बाद उनकी खुशी में चार चांद लग गए।

बेटे के लिए मां हर रोज गुरुद्वारे में करती थी प्रार्थना
मां महेंद्र कौर ने बताया कि जब से उसका बेटा गुल्लू उनसे बिछड़ा तब से वह चैन की नींद नही सो पाई। उसने अनेक तांत्रिकों से मिलकर अपने बेटे से मिलाने की गुहार लगाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
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थक हार कर वह पिछले काफी समय से श्री गुरू ग्रंथ साहिब के समक्ष रोजाना सुबह गुरुद्वारे जाकर बेटे से मिलाने की प्रार्थना कर रही थी। उन्होंने बताया कि गुरुओं के आशीर्वाद से ही वह अपने बेेटे से मिल पाई है।
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