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16 साल बाद एससी वर्ग के लिए आरक्षित हुआ फतेहाबाद नप चेयरमैन का पद

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नगर परिषद कार्यालय फतेहाबाद। - फोटो : Fatehabad
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नगर परिषद और नगर पालिकाओं में चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज होने वाली है। प्रधान पद आरक्षित करने को लेकर पंचकूला में ड्रॉ निकाल दिया गया है। फतेहाबाद में प्रधान पद अनुसूचित जाति, टोहाना और भूना में सामान्य तथा रतिया महिला सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित कर दिया गया है। प्रधान पद के लिए फतेहाबाद में अनुसूचित जाति तथा रतिया में महिला सामान्य वर्ग से ही उम्मीदवार चुनाव लड़ सकेंगे। नगर परिषद बनने के 16 सालों बाद एससी वर्ग से किसी दावेदार को चेयरमैन बनने का मौका मिलेगा।
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पहली बार प्रधान पद के लिए सीधे चुनाव होंगे। पहले पार्षद प्रधान चुनते थे। प्रधान पद के लिए ड्रॉ घोषित होने के बाद फतेहाबाद में चुनाव लड़ने का सपना देख रहे सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को झटका लगा है। क्यों कि चुनाव को लेकर कई उम्मीदवार एक साल से तैयारियों में जुटे हुए थे। बता दें कि प्रधान पद के फतेहाबाद में अनुसूचित जाति वर्ग से ही चुनाव लड़ पाएगा। ऐसा पहली बार होगा जब सामान्य श्रेणी से प्रधान नहीं होगा। अब तक सामान्य श्रेणी से ही नगर परिषद में प्रधान बनते रहे है। 2005 में उषा चौधरी, 2010 में वीरेंद्र नारंग, 2015 में सुनील बंसल तथा 2016 में दर्शन नागपाल नगर परिषद में प्रधान चुने गए। फतेहाबाद की जनसंख्या करीब सवा लाख है। इसमें 52 हजार मतदाता है। सबसे ज्यादा वोटर सामान्य वर्ग से है। हालांकि, अभी नगर परिषद फतेहाबाद की सीमा बढ़ने के कारण नए सिरे से वार्डबंदी होगी।
फतेहाबाद में अब तक ये बन चुके है प्रधान
प्रधान कब से कब तक
उषा चौधरी 24 मई 2005 से 21 अप्रैल 2010
विरेंद्र नारंग 8 जुलाई 2010 से 23 फरवरी 2015
सुनील बंसल 24 फरवरी 2015 से 16 जून 2015
दर्शन नागपाल 29 जून 2016 से 12 जून 2021
प्रधान पद आरक्षित होने के बाद समीकरण बदलें
नगर निकाय पहले प्रधान अब चुना जाएगा
फतेहाबाद सामान्य श्रेणी अनुसूचित जाति
रतिया महिला अनुसूचित जाति सामान्य वर्ग (महिला)
टोहाना अनुसूचित जाति सामान्य श्रेणी
भूना अनुसूचित जाति (महिला) सामान्य श्रेणी
फतेहाबाद में सामान्य श्रेणी महिला के लिए आरक्षित होने की थी उम्मीद
नगर परिषद फतेहाबाद में प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद सामान्य श्रेणी से चुनाव लड़ने का सपना देख रहे उम्मीदवारों को झटका लगा है। ड्रॉ को लेकर उम्मीद जताई जा रही थी कि यहां से सीट सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हो सकती है। अगर सामान्य वर्ग से पुरुष चुनाव नहीं लड़ सकते हैं तो वह अपनी पत्नी को उम्मीदवार उतार सकते थे, लेकिन अब उम्मीदों पर पानी फिर गया।
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