फतेहाबाद। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बार किसानों को रोकने के लिए काफी अक्लमंदी से काम किया। पंजाब सीमा पर प्रशासन ने नाके लगाने के बजाय, उन स्थानों को चुना, जहां से किसान आगे नहीं बढ़ सकते थे। प्रशासन ने इसके लिए पंजाब सीमा से निकलने के बाद सभी नहरों व सेम नालों तथा रंगोई नालों के पुलों पर बख्तरबंदी कर दी। किसानों के आगे सामने जहां कीलों व आठ फुट ऊंची सीमेंटेड ब्लॉक्स लगाकर इन पुलों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया, वहीं पैरामिलिट्री फोर्स व पुलिस को भी तैनात कर दिया गया।
फतेहाबाद से 13 फरवरी को पंजाब से किसानों के आने की सूचना पाकर प्रशासन पहले से ही सतर्क हो गया था। किसानों के आगमन से पहले ही प्रशासन ने अपनी ओर से तैयारियां आरंभ कर दी। पैरामिलिट्री की 6 टुकड़ियों को बुलाया गया और इनकी तैनाती भी हर अहम नाकों पर की गई। फतेहाबाद में रतिया का ब्राहमणवाला, हांसपुर, जाखल का म्योंद नाका, टोहाना के चंडीगढ़ रोड से गुजरने वाला नेशनल हाइवे 148-बी सबसे अहम रास्ते थे, जहां से भारी संख्या में पंजाब से किसान फतेहाबाद की सीमा में घुस सकते थे। हालांकि पंजाब सीमा आरंभ होते ही प्रशासन की ओर से सभी चौकियों पर नाके लगाए गए हैं, लेकिन इस बार प्रशासन ने अपनी अलग ही प्लानिंग बनाई हुई थी। ब्राह्मणवाला से रतिया की ओर आते समय करीब 6 किलोमीटर आगे रोझांवाली में सेम नाला है। इस पर पुल बना है और दोनों ओर गहरा सेम नाला है। ब्राह्मणवाला चौकी पर बख्तरबंदी के बजाय प्रशासन ने रोझांवाली के इसी सेम नाले को चुना और यहां पर पक्का नाका लगा दिया। पुल पर भारी फोर्स के साथ कंटीली तारें, कीलों के अलावा यहां पर गड्ढे खोदकर गहरी खाई खोद दी गई। साथ के इलाकाें में भी पानी भरने का प्रबंध कर दिया गया।
यही टेक्निक जाखल के गांव म्योंदकलां में अपनाई गई, यहां से गुजरने वाली नहर के पुल पर सुरक्षा व्यवस्था पाबंद कर दी गई। इसके अलावा टोहाना में नेशनल हाईवे 148 बी पर भी पुलिस ने नहर के पुल पर ही नाका लगाया, ताकि अगर किसान सामने से आएं तो उनको रोका जा सके, लेकिन अगर वह दूसरा विकल्प लेते हैं तो ट्रैक्टरों व अपने साधनों को नहर पार नहीं कर सकते थे। फतेहाबाद में भी रतिया से आ रहे किसानों को भी प्रशासन ने न तो हमजापुर, न ही अहरवां व गांव अयाल्की के पास रोका। अयाल्की से आगे फतेहाबाद के पास बने रंगोई नाले पर पुलिस ने घेरा बंदी कर दी। जिस कारण किसान अयाल्की से आगे नहीं निकल पाए, क्योंकि किसान न तो नाका पार सकते थे और न ही रंगाेई नाला। संवाद
प्रशासन की ओर से किसानों से यही अपील है कि वह अपनी बात सरकार के सामने शांतिपूर्वक व धैर्य से रखें। इस प्रकार सड़कों पर आने से आम जनता व यातायात में परेशानी होती है। किसानों को अपनी बात रखने के लिए ज्ञापन दें और आम जनता को परेशान ना करें। हमने प्रबंध इसलिए किए हैं, ताकि लॉ एंड ऑर्डर बना रहे।
आस्था मोदी, एसपी फतेहाबाद।