फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में चार्ज की गई राशि के लिए गड़बड़ी करने के मामले में कमेटी की जांच जारी है। मामले में मंगलवार को कमेटी ने वीआरएस ले चुके एसएमओ डॉ. राजेश चौधरी और दो लेखाकारों भीम सिंह और इंद्र के बयान दर्ज किए। कमेटी ने संबंधित अधिकारियों से रिकॉर्ड और चार्ज राशि को लेकर सवाल-जवाब किए।
बताया जा रहा है कि लेखाकारों ने भी प्रभारियों की तरह छह साल तक न रिकॉर्ड देखा और न ही बैंक खाता संभाला। ब्लड बैंक की तरफ से लेखाकारों को नकदी रिकॉर्ड रजिस्टर संबंधित जानकारी नहीं दी गई।
जांच कमेटी को भी 6 साल का नकदी रिकॉर्ड रजिस्टर नहीं मिला है। कमेटी ने मंगलवार को ब्लड बैंक के संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी करके रजिस्टर उपलब्ध करवाने के लिए कहा है। इस मामले में अभी वीआरएस ले चुके उप सिविल सर्जन डॉ.हनुमान, इंचार्ज रह चुके डॉ. गौरव सैनी के भी बयान होने है।
30 लाख से ज्यादा की राशि के घपला करने की आशंका
ब्लड बैंक में सरकारी अस्पताल से आने वाले मरीज के लिए निशुल्क सुविधा है और निजी अस्पताल से आने वाले मरीज से चार्ज के रूप में 1100 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से राशि ली जाती है। ब्लड बैंक के बैंक खाते को जब नागरिक अस्पताल के अधिकारियों ने हाल ही में संभाला तो पता चला कि वर्ष 2019 के बाद अधिकतर चार्ज राशि जमा नहीं करवाई गई। ब्लड बैंक में संबंधित राशि लेने वाले कर्मचारियों को रिकॉर्ड पूरा करते हुए जमा करवानी थी। जानकारों की माने तो करीब 30 लाख से ज्यादा की राशि का गबन हुआ है।
12 रसीदें मिल चुकी हैं गायब
मामले में जांच को लेकर सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र ने कमेटी का गठन कर रखा है। इसमें उप सिविल सर्जन मेजर डॉ. शरद तुली, डॉ. गुंजन बंसल, लेखाकार रविंद्र शामिल है। पिछले सप्ताह 17 सितंबर को इंचार्ज रह चुके डॉ. अस्मिता, डॉ. प्रीति और डॉ. नेहा, डॉ. लवलीन और डॉ. रासिद के बयान दर्ज हो चुके हैं। कमेटी को रिकॉर्ड जांच के दौरान 12 रसीदों की नकल कॉपी गायब मिल चुकी है। हालांकि कमेटी की जांच रिपोर्ट के बाद पूरा मामले का खुलासा हो पाएगा कि इस गड़बड़ी में कौन-कौन शामिल है।