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Fatehabad News: नन्हीं सी जान जन्म के साथ बन रही हृदय रोगी

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फतेहाबाद में बच्चों की स्क्रीनिंग करती स्वास्थ्य विभाग की टीम।
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फतेहाबाद। नन्हीं सी जान जन्म के साथ ही हृदय रोगी बनकर इस दुनिया में आ रहे हैं। जन्म के दौरान बेशक उनमें दिल की बीमारी से संबंधित लक्षण नजर नहीं आ रहे है। लेकिन उम्र बढऩे के साथ-साथ बीमारी अपना रूप भी सामने ला रही है। स्क्रीनिंग के दौरान ही पिछले 6 सालों में जिले में 206 बच्चों के दिल में छेद मिला है।
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बता दें कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र के द्वारा बच्चों की आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में स्क्रीनिंग की जाती है ताकि समय रहते बच्चे में गंभीर बीमारी का पता चल सके। वर्ष 2018 से लेकर 2024 तक स्क्रीनिंग के दौरान 206 बच्चों में दिल के छेद की बीमारी मिली है। इन बच्चों का स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऑपरेशन भी करवाया गया है। डॉक्टरों की माने तो गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड की कमी होना भी कारण होता है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान एल्कोहल लेना, धूम्रपान करना भी गर्भ में पल रहे शिशु की जान के लिए आफत बनता है। नवजात बच्चों में इसके लक्षणों की पहचान कर पाना मुश्किल होता है। एएसडी एक जन्मजात हृदय दोष है, ये तब होता है जब सेप्टम ठीक से नहीं बनता है। इसे दिल में छेद भी कहा जाता है, ये गंभीर बीमारी है। दिल में छेद के कारण बच्चे का विकास नहीं हो पाता है। नवजात शिशुओं में इस बीमारी के लक्षण शुरूआत में नजर नहीं आते हैं। संवाद
पिछले साल 123 बच्चे मिले गंभीर बीमारी से पीड़ित
जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र में वर्ष 2023-24 में स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। जिसमें 4612 बच्चे अलग-अलग बीमारियों से ग्रस्त मिले और पंजीकृत किए गए। इनमें गंभीर बीमारियों से पीड़ित 123 बच्चे मिले हैं। जिसमें होंठ कटे फटे होना, असमान्य आकार का कुल्हा होना, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, डाउन सिंड्रोम, पैर टेढ़े होना आदि शामिल है। दिल में छेद होने के 24 बच्चे मिले हैं। जिनका विभाग द्वारा पैनल अस्पताल में ऑपरेशन करवाया गया है।
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दिल में छेद के लक्षण
- सांस लेने में तकलीफ होना।
- पीली त्वचा और होंठ और नाखूनों के पास नीले रंग का दिखना।
- वजन बढऩे में दिक्कत होना।
- भोजन करते समय पसीना आना।
- लगातार खाने में असमर्थ होना।
- अत्याधिक रोना।
- हृदय गति का तेज होना।
जिले में ये मिले हैं दिल में छेद से ग्रस्त बच्चे
वर्ष मरीज
2018-19 54
2019-20 53
2020-21 21
2021-22 26
2022-23 28
2023-24 24
कोट
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र के द्वारा बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है। जो बच्चे गंभीर बीमारी से पीड़ित मिलते हैं उनका पैनल अस्पताल में उपचार करवाया जाता है। दिल में छेद होने के जो केस सामने आते हैं उनका विभाग द्वारा पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करवाया जाता है।
-सुखदेव सिंह, मैनेजर, जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र
कोट
जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए डीईआईसी वरदान साबित हो रहा है। विभाग की अलग-अलग टीमें आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती है। अगर कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित मिलता है तो नियम अनुसार पैनल में शामिल निजी अस्पताल में उपचार करवाया जाता है।
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-डॉ. लाजवंती गौरी, उप सिविल सर्जन
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