फतेहाबाद। सिविल सर्जन कार्यालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा करने का खेल साढ़े चार साल से चल रहा था। जांच में 80 प्रमाण पत्र फर्जी तो 842 संदिग्ध मिले हैं, वहीं मामले में दो कंप्यूटर ऑपरेटर भी संलिप्त पाए गए हैं। डॉक्टरों की असेसमेंट शीट में गड़बड़ी करके फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। कई दिव्यांग प्रमाण पात्रों की असेसमेंट शीट पोर्टल पर अपलोड ही नहीं की गई। पिछले करीब सात माह में ही सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा किया गया। इसका खुलासा दिव्यांग प्रमाण पत्रों की जांच को लेकर बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है।
बता दें कि मामले की जांच कर रही छह डॉक्टरों की कमेटी ने सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत को रिपोर्ट सौंप दी है। अब मामले में सिविल सर्जन स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय को रिपोर्ट भेजकर मार्गदर्शन मांगेगी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2018 से लेकर जुलाई 2022 तक सिविल सर्जन कार्यालय ने 3769 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए हैं। इसमें 80 दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी मिले और 842 संदिग्ध पाए गए हैं, इनका सिविल सर्जन कार्यालय में रिकॉर्ड ही नहीं मिला है। मामले में संलिप्त पाए गए दो कंप्यूटर ऑपरेटर पर कार्रवाई होना तय है और इसके साथ-साथ संबंधित उप सिविल सर्जन पर भी लापरवाही को लेकर गाज गिर सकती है। दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर जनवरी 2018 से लेकर अब तक दो उप सिविल सर्जन के पास कार्यभार रह चुका है।
कमेटी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2018 से लेकर जुलाई 2022 तक सिविल सर्जन कार्यालय ने 3769 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए। जांच के दौरान 922 संदिग्ध पाए गए। टीम ने जब संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच की तो 80 दिव्यांग प्रमाण पत्रों का रिकार्ड मिला। रिकार्ड जांच के दौरान करीब 30 प्रमाण पत्र ऐसे पाए गए जिनमें असेसमेंट शीट और दिव्यांग प्रमाण पत्र में प्रतिशत अलग-अलग मिली। करीब 32 दिव्यांग प्रमाण पत्र ऐसे मिले जिनकी असेसमेंट शीट में हस्ताक्षर का मिलान नहीं हो पाया। इसके अलावा अन्य प्रमाण पत्र ऐसे मिले जिनमें असेसमेंट शीट और दिव्यांग प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर सही नहीं मिले और प्रतिशत अलग-अलग थी। इसके अलावा कई असेसमेंट शीट में कटिंग भी मिली।
वर्ष 2018 से चल रहा था खेल
कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे फर्जीवाड़ा में डीलिंग हेड यानी कंप्यूटर ऑपरेटरों की अहम भूमिका रही है। वर्ष 2018 से लेकर जून 2022 तक दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने में फर्जीवाड़ा का खेल किया गया। इसमें दो कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल रहे हैं जिन पर गड़बड़ी करने का शक है। हालांकि दोनों ही पहले हटाए जा चुके है। इसके अलावा दो उप सिविल सर्जनों पर भी लापरवाही को लेकर गाज गिर सकती है। सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत के मुताबिक जनवरी 2018 से अगस्त 2021 तक उप सिविल सर्जन डॉ. संगीता मेहता के पास कार्यभार रहा और सितंबर 2021 से लेकर अब तक डॉ. वीना के पास चार्ज है। अधिकारियों की माने तो पिछले करीब सात माह में ही सबसे ज्यादा संदिग्ध दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी हुए हैं।
इन डॉक्टरों की कमेटी ने की दिव्यांग प्रमाण पत्रों की जांच
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का मामला सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ.सपना गहलावत ने कमेटी बनाकर जांच करने के आदेश दिए थे। कमेटी में छह डॉक्टर शामिल किए गए। जिसमें उपसिविल सर्जन डॉ. कुलदीप, डॉ. हमेश, एसएमओ डॉ. राजेश चौधरी, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कसवां, ईएनटी डॉ. जेपी और मेजर डॉ. शरद तुली शामिल रहे।
ऐसे सामने आया फर्जीवाड़ा
दिव्यांग प्रमाण पत्रों को लेकर वेरिफिकेशन चल रही है। पिछले दिनों सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत ने बताया था कि वेरिफिकेशन के दौरान मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश को दो दिव्यांग प्रमाण पत्र ऐसे मिले, जिनमें एक केस ऐसा था जो कि उनकी ओपीडी में नहीं आया और उसका दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी हो रखा था और इसके अलावा एक केस ऐसा था जिसमें असेसमेंट शीट में जो प्रतिशत दी गई वह दिव्यांग प्रमाण पत्र में अलग थी। दिव्यांग प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा का शक हुआ और इसके बाद सिविल सर्जन ने जांच कमेटी गठित की थी।
कोट
दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर छह डॉक्टरों की कमेटी गठित की थी। कमेटी ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है। जनवरी 2018 से लेकर अब तक पोर्टल पर जो दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी हुए, उनकी जांच की गई है। जांच में 900 से ज्यादा प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए। 80 प्रमाण पत्रों की रिकॉर्ड से मिलान किया गया तो असेसमेंट शीट में अलग है और हस्ताक्षर भी मैच नहीं हुए है। मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों भेजी जाएगी और मार्गदर्शन मांगा जाएगा। इस मामले में अधिकारियों की संलिप्त हैं या नहीं, इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। इस संबंध में मुख्यालय से ही जांच बिठाई जाएगी।
-डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन
कोट
दिव्यांग प्रमाण पत्र के फर्जीवाड़ा का जो मामला है उसमें हमारी तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई है और न ही कोई गड़बड़ी की गई है। ऑपरेटर द्वारा कंप्यूटर पर प्रमाण पत्र चेक करवाए जाते थे। उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर वो ही प्रमाण पत्र चेक करवाता था जो सही होते थे। कंप्यूटर ऑपरेटर को जब चेक करवाने के लिए कहा जाता था तो वह नेट न चलने की बात कहता था।
-डॉ. वीना, उप सिविल सर्जन, फतेहाबाद।