अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद/भट्टूकलां। पंचायती राज विभाग के वित्त सचिव ने बुधवार को फर्जी शैक्षणिक योग्यता दिखाकर सरपंच पद हासिल करने के मामले की सुनवाई करते हुए गांव दैयड़ व नहला की सरपंच को बर्खास्त कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव दैयड़ से सिलोचना देवी और नहला से नीलम रानी ने सरपंच पद पर जीत हासिल की थी। गांव दैयड़ की सरपंच सिलोचना देवी की जीत के बाद गांव के दूसरे पक्ष के रोहताश कुमार ने डीसी कोर्ट में याचिका डालकर सिलोचना देवी की शैक्षणिक योग्यता को चुनौती देते हुए इसे फर्जी बताया था। अपनी चुनौती में रोहताश ने बताया कि सरपंच पद के लिए सिलोचना देवी ने जो प्रमाण पत्र दिया है, वह फर्जी है। जिस प्रमाण पत्र को उन्होंने चुनाव में प्रयोग किया है, उस स्कूल को मान्यता भी 2006 को मिली थी। जबकि यह प्रमाण पत्र वर्ष 2001-02 का है। इस चुनौती की सुनवाई करते हुए डीसी ने 21 मई 2018 को दैयड़ की सरपंच सिलोचना देवी को सस्पेंड कर दिया था। लेकिन बाद में सरपंच ने इस फैसले को पंचायती राज विभाग के एफसी के पास अपील कर स्टे ले लिया। बुधवार को मामले की सुनवाई करते पंचायती राज विभाग के वित्त सचिव ने सिलोचना देवी को बर्खास्त कर दिया।
इसी प्रकार गांव नहला की सरपंच नीलम देवी को भी वित्त सचिव ने बुधवार को बर्खास्त कर दिया। इस संबंध में गांव के आशुतोष शर्मा ने डीसी कोर्ट में नीलम देवी की शैक्षणिक योग्यता को चुनौती दी थी। आरोप था कि नीलम देवी ने अपनी 8वीं की मार्कशीट रतिया की एक अकादमी की दिखाई है, जो पूरी तरह से फर्जी है। जांच में पाया गया कि यह मार्कशीट वास्तव में फर्जी थी। इस मामले में भी वित्त सचिव ने नीलम देवी को बर्खास्त कर दिया है।